
भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतोउत्सव हर्षण योग में 04 सितंबर दिन शुक्रवार को शास्त्रोक्त मनाई जाएगी। पूजन मुहूर्त समय,विधि,सामग्री जाने ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से 9634408321
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय के ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने बताया ज्योतिषशास्त्र एवं वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतोउत्सव 04 सितंबर दिन शुक्रवार को शास्त्रोक्त मनाई जाएगी। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 03/04सितंबर की रात्रि 12 बजकर 25 मिनट बजे से शुरू होकर 04/05 सितंबर की मध्यरात्रि 12 बजकर 13 मिनट बजे तक रहेगी।इस उत्सव के लिए सूर्योदय का न विचार कर बल्कि मध्य रात्रि जिस दिन अष्टमी मिले उसी दिन उत्सव मनाना शास्त्रोक्त हैं !04 सितम्बर दिन शुक्रवार के मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि प्राप्त हो रहा हैं !अतः इसी दिन व्रतोउत्सव शास्त्रोक्त हैं !शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में बताया गया हैं । इसलिए जन्माष्टमी पर दिनभर व्रत और भगवान का स्मरण करके मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा हैं। ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया इस दिन हर्षण योग बन रहा हैं ,तथा इस पूजन में निशीथ काल का समय महत्वपूर्ण हैं रात्रि 11 बजकर 40 मिनट बजे से रात्रि 12 बजकर 26 मिनट बजे तक का समय अत्यंत महत्वपूर्ण पूजन मुहूर्त हैं !जन्माष्टमी का व्रत केवल भोजन न करने का नियम नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति, मन की शुद्धि, इन्द्रिय संयम और आध्यात्मिक साधना हैं।भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए भक्त दिनभर भगवान का नाम-स्मरण, जप, भजन और कथा करते हैं तथा मध्यरात्रि में भगवान के प्राकट्य का उत्सव मनाते हैं।मन और इन्द्रियों पर संयमव्रत के माध्यम से व्यक्ति अपनी इच्छाओं और इन्द्रियों पर नियंत्रण का अभ्यास करता हैं।आत्मशुद्धि के लिए धार्मिक मान्यता हैं, कि श्रद्धा से किया गया व्रत व्यक्ति को अपने भीतर के दोष,क्रोध, लोभ,अहंकार और द्वेष को कम करने की प्रेरणा देता है।भगवान के प्रति समर्पण व्रत का भाव हैं,श्रीकृष्ण ने कर्म, धर्म, भक्ति और सत्य का संदेश दिया। जन्माष्टमी पर व्रत के साथ उनके उपदेशों का स्मरण करना विशेष माना जाता हैं।सर्वप्रथम व्रत का संकल्प प्रातः स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण के सामने संकल्प करें!मैं भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और कृपा प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जन्माष्टमी व्रत का पालन करूंगा/करूंगी।दिनभर भगवान का स्मरण दिनभर श्रीकृष्ण नाम का जाप ,श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ,श्रीकृष्ण जन्म कथा,भजन-कीर्तन भगवान के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ हैं।जो लोग निर्जल व्रत कर सकते हैं वे अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल रह सकते हैं।अन्य भक्त फलाहार कर सकते हैं,फल,दूध,दही,मखाना,साबूदाना,सिंघाड़े का आटा,कुट्टू,आलू,शकरकंद व्रत में क्या ग्रहण करना है, यह अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार तय करना चाहिए।अनाज का त्याग करें !परंपरागत जन्माष्टमी व्रत में सामान्यतः चावल, गेहूं, दाल और सामान्य अन्न का सेवन नहीं किया जाता।सात्त्विक आचरण व्रत के दिन केवल भोजन का संयम ही नहीं, बल्कि व्यवहार का संयम भी महत्वपूर्ण है।क्रोध, झूठ, निंदा, हिंसा और विवाद से बचना चाहिए।रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय के आसपास पूजा की जाती हैं।बाल गोपाल/लड्डू गोपाल की प्रतिमा,पंचामृत,गंगाजल,दूध,दही,घी,शहद,शक्कर,पीले वस्त्र,चंदन,तुलसी दल,माखन-मिश्री,फल,फूल,धूप-दीप,नैवेद्य,झूला,इन सभी पूजन सामग्री की आवश्य्कता हैं !सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं,गंगाजल से अभिषेक करें।भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं।चंदन, फूल और तुलसी अर्पित करें।माखन-मिश्री पंजीरी,धनियां का भोग लगाएं।बाल गोपाल को झूले में विराजमान करें।श्रीकृष्ण जन्म की कथा पढ़ें या सुनें।भगवान के जन्म के समय शंख और घंटी बजाएं।आरती करें। प्रसाद वितरित करें! नमो भगवते वासुदेवाय।इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक तुलसी के माला से जाप करें।तथा महामंत्र का भजन करें !हरे कृष्ण हरे कृष्ण,कृष्ण कृष्ण हरे हरे।हरे राम हरे राम,राम राम हरे हरे॥का संकीर्तन भी करें। व्रत पारण हेतु कई भक्त मध्यरात्रि में भगवान के जन्मोत्सव और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता हैं! इसलिए अपने संप्रदाय/पारिवारिक परंपरा के अनुसार पारण करना चाहिए। ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने सभी भक्तों से आग्रह किया बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या किसी बीमारी/दवा की आवश्यकता वाले व्यक्ति को कठोर निर्जल व्रत नहीं करना चाहिए। धार्मिक व्रत में अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना आवश्यक हैं।जन्माष्टमी का सार केवल व्रत रखना और रात में पूजा करना नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण का संदेश हैं, कि मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी धर्म, सत्य, कर्तव्य और भक्ति का मार्ग न छोड़े।
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🚩श्री ज्योतिष कार्यालय🚩
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
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ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ
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