
दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रोफेसर्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावों पर खुलकर बोले
हापुड़, सीमन/ संजय कश्यप (ehapurnews.com): स्थानीय जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, हापुड़ में “मानव कल्याण हेतु साहित्य का योगदान” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन एसोसिएशन फॉर इंग्लिश स्टडीज ऑफ़ इंडिया (ए०ई०एस०आई०) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें देश भर के विभिन्न प्रदेशों के विश्वविद्यालयों से आए प्रोफेसर्स ने मानव कल्याण हेतु साहित्य का योगदान सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर खुलकर अपने विचार प्रकट किये।
बतौर मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के प्रो० एम० रिजवान खान ने अपने व्याख्यान में कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है, जो करुणा, सहानुभूति और न्याय की भावना को जगाता है। उन्होंने साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी की प्रो० निशा सिंह, ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बोलते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति अच्छी बनी थी किन्तु इसके धरातल पर दूरगामी परिणामो के विषय में चिंतन नहीं किया गया। इस नीति के साथ विश्वविद्यालयों में अध्यापन व् शिक्षा कार्य प्रभावित हुआ हैं। आवश्यकता इस बात की हैं कि इस के क्रियान्वयन व् प्रभावों पर पुनर्विचार किया जाये।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के प्रो० सरोज कुमार महानंदा ने कहा कि साहित्य समाज का प्रतिबिम्ब है लेकिन प्रत्येक काल में साहित्य बदलता रहा हैं।
प्रसिद्ध उपन्यासकार व् महामत्री ए०ई०एस०आई० प्रो० विकास शर्मा ने कहा कि साहित्य में वह ताकत होती हैं जो अधिनायकवादियों को सही रास्ते पर ला सकें। साहित्यकारों को चाहिए कि वे समाज कल्याण के लिए साहित्य रचना करें।
नागपुर के प्रोफेसर प्रो० सुदेश एम० बी० भोवते ने कहा कि साहित्य भावनाओं, संवेदनाओं और कल्पना का अद्भुत मिश्रण है। यह मनुष्य को सोचने, महसूस करने और बेहतर समाज बनाने की प्रेरणा देता है। साहित्य ही वह दीपक है, जो अंधकार में भी आशा की किरण जगाता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ० रागिनी कपूर ने कहा कि प्लेटो से लेकर आज तक साहित्य के विषय में विभिन्न प्रकार के मत बनते रहे हैं। लेकिन यह सर्वमान्य हैं कि साहित्य का कोई विकल्प नहीं हैं।
ए०ई०एस०आई० के चेयरमैन व् जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के महानिदेशक प्रो० सुभाष गौतम ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य में चौसर से लेकर आधुनिक साहित्य तक कवियों व लेखकों ने समाज का मार्गदर्शन किया। साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि मानवता का पथप्रदर्शक है, जो हमें विचार, संवेदना और संस्कृति से जोड़ता है।
संगोष्ठी के सभी मंचासीन अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया व तीन तकनीकी सत्रों में 50 से अधिक शोधपत्रों का वाचन हुआ।
डॉ० नीलम कुमारी (विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी, किसान पी.जी. कॉलेज, सिम्भावली, हापुड़), डॉ० सतीश गुप्ता (एसोसिएट प्रोफेसर, आर०के०जी०आई०टी० गाज़ियाबाद) डॉ० दिव्या बाला पाठक (विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी, ए.एस. (पी.जी.) कॉलेज, लखावटी, बुलंदशहर), डॉ० सुमित्रा सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर, एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा), डॉ० शीनू चौधरी (प्राचार्य, आर०डी०पी०डी० गर्ल्स पी०जी० कॉलेज, जहांगीराबाद, बुलंदशहर) डॉ० दीपा त्यागी (विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी, जे०एस०एस० अकादमी ऑफ़ टेक्निकल एजुकेशन, नोएडा) आदि ने विभिन्न तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता की।
जे०एम०एस० ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के फाउंडर चेयरमैन एवं संगोष्ठी के संरक्षक राकेश सिंघल, वाईस चेयरमैन, डॉ० हिमांशु सिंघल, व् मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ० आयुष सिंघल ने अतिथियों का स्वागत किया व सभी के संस्थान में पधारने के लिए आभार प्रकट किया। सांयकालीन सत्र में क्रिएटिव राइटिंग सेशन का आयोजन जे०एम०एस० ग्रुप के कल्चरल क्लब के तहत किया गया जिसका सफल संचालन कक्षा 10 की छात्रा सिया शर्मा ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में कवि व् उपन्यासकार प्रो० विकास शर्मा से “मीट द ऑथर” में अनगिनत उपन्यासों से सम्बंधित प्रश्न पूछे गए और माहौल को अत्यधिक अकादमिक बना दिया। व् छात्र छात्राओं ने अपने प्रिय उपन्यासकार के प्रसिद्ध उपन्यासों पर वार्ता की। प्रो० विकास शर्मा ने अपने नवीनतम उपन्यास” आल हर फायर्स” का उल्लेख किया।
संगोष्ठी में देशभर से आए विद्वानों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और छात्रों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने साहित्य को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का उत्प्रेरक बताते हुए कहा कि यह हमें न केवल सोचने पर मजबूर करता है, बल्कि कार्य करने की प्रेरणा भी देता है।
कार्यक्रम का सफल संचालन चौ० चरण सिंह वि०वि०, मेरठ की शोधार्थी रिया देशवाल ने किया।
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