हापुड़,सीमन (ehapurnews.com):लोगों में जलवायु परिवर्तन के मुताबिक अपने को ढालने की क्षमता होती है। फिर भी मौसम में अचानक परिवर्तन और प्रबल स्थितियों के प्रति वह संवेदनशील हैं। इस मौसम में कोहरे/शीतलहर का समाना लोग करने लगे हैं, आगे और करना पड़ेगा । थोड़ा और पारा गिरता है और पूरे दिन धूप नहीं निकली तो शीतलहर के आगोश में आकर बहुत सी बीमारियों की चपेट में लोग आ सकते हैं। डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) को शीतलहर के दौरान होने वाली बीमारियों की चपेट में आने की आशंका सताने लगी है। इसका प्रभाव लोगों पर कम से कम हो इसके लिए डीडीएमए ने सक्रियता बढ़ा दी है। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण हापुड़ की अध्यक्ष व जिलाधिकारी अदिति सिंह की कोशिश है की कोहरा और शीतलहर से लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव न पड़े। उन्होने जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण के सचिव व डिजास्टर मैनेजमेंट के नोडल अफसर एडीएम फाइनेंस जय नाथ यादव को शीत लहर के जोखिम को कम करने के लिये प्रभावी व्यवस्था करने के लिये निर्देशित किया है। डीएम की पहल पर एडीएम ने सभी विभागों को इस खतरे को कम करने के लिये कारगर कदम उठाने के लिये कहा है। स्वस्थ्य विभाग, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, शिक्षा विभाग और आँगनबाड़ी को शीतलहर के दौरान होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये कहा गया है। डीडीएमए की ओर से हेल्थ डिपार्टमेंट को शीतलहर के दौरान होने वाली बीमारियों से लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल , सामुदायिक अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण की अध्यक्ष जिलाधिकारी अदिति सिंह ने आम जनमानस से भी अपील की है की अपने बचाव के लिये स्वयं सावधानी बरतें, अपने परिवार का ध्यान रखें। अन्य बिमारियों से ग्रसित लोगों पर कोविड 19 का प्रभाव अधिक हो रहा है। कोविड 19 के जोखिम को कम करने के लिये अन्य बिमारियों के जोखिम को कम करना बेहद जरुरी है। शीतलहर के दौरान हो सकती है ये बीमारियां:
1- हाइपोथर्मिया: इसमें शरीर का तापमान ज्यादा कम हो जाता है। यह स्थिति ठंडके कारण होती है। इसमें व्यक्ति धीमी और जल्दी जल्दी सांस लेता है और उसका चेतना का स्तर कम होता जाता है। व्यवहार व्यक्ति का आक्रामक होनेलगता है, काम में गड़बड़ी होने लगती है, आवाज भी स्पस्ट नहीं होती है।
2 – तुषार उपघात (frost-bite): शीतलहर में रहने से त्वाचा के उत्तकों की क्षति होने लगती है। इससे शरीर के प्रभावित क्षेत्र में छाले और फफोले हो सकते हैं। क्षति गंभीर होने पर अंग को काटने की भी नौबत आ सकती है।
3- फ्रास्टनिप (frostnip): शीतलहर में अधिक रहने से त्चचा सुन्न हो जाती है।उसका रंग नीला और सफेद हो जाता है। सामान्यत: चेहरा अथवा अंगुलियों केआगे के हिस्से प्रभावित होते हैं। ऐसे में उस भाग को गर्म करें , ठीक होने लगेगा। कुछ देर में त्वचा का रंग पहले जैसा हो जाएगा।
बचाव के उपाय
1- ऐसे मरीज को गर्म स्थानों पर ले जाएं।2-उसके शरीर को गर्म कपड़ों में लपेटें।3- मरीज को हर 15 मिनट बाद गर्म पानी या सूप पीने को दें।4- मरीज चेतन अवस्था में है तो उसे थोड़ा खाना भी दें।5- मरीज बेहोश होने लगे और होश में शीघ्र नहीं आता है तो उसे तुरंत हास्पीटल में भर्ती करायें।


























