टीबी के दो बड़े कारण, पोषण और वातावरण : डीटीओ
– जिला क्षय रोग विभाग ने एनएसएस स्वयं सेवकों का टीबी के प्रति संवेदीकरण किया
– एसएसवी पीजी कॉलेज में विश्व टीबी दिवस के मौके पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़, 26 मार्च, 2024। विश्व टीबी दिवस के मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील त्यागी के कुशल निर्देशन में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में जिला क्षय रोग विभाग ने एसएसवी पीजी कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर में शामिल स्वयं सेवकों का टीबी के प्रति संवेदीकरण किया। स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने टीबी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा – टीबी केवल गरीबों की बीमारी नहीं है, बैक्टीरिया से होने वाली यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन यह भी सच है कि टीबी के दो बड़े कारण हैं, पोषण और वातावरण। कार्यक्रम के दौरान एसएसवी पीजी कॉलेज से डा. जीके शर्मा, डा. राहुल कुमार धामा, डा. संजय कुमार रावत और डा. देवेंद्र प्रताप सिंह का सहयोग रहा।
डीटीओ डा. राजेश सिंह ने इन दोनों कारणों पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया – जिन व्यक्तियों में पोषण की कमी होती है, उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाती है। ऐसे व्यक्तियों को टीबी समेत तमाम संक्रामक रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा – हमारे देश में 80 प्रतिशत से ज्यादा मामले पल्मोनरी (फेफड़ों की) टीबी के होते हैं। पल्मोनरी टीबी सांस के जरिए फैलती है। रोगी के बोलते, खांसते या छींकते समय मुंह से निकलने वाले ड्रॉपलेट के साथ टीबी के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया (माइकोबैक्टीरियम टयूबरक्लोसिस) हवा में चला जाता है और उस वातावरण में सांस लेने वाले व्यक्ति के सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है।
डीटीओ ने बताया – बैक्टीरिया कमजोर व्यक्ति को अपना शिकार बना लेता है। बंद स्थान और मलिन बस्तियों में रहने का स्थान हवादार न होने के कारण बैक्टीरिया ज्यादा समय तक मौजूद रहता है और ऐसे स्थानों पर रहने वालों को क्षय रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है। उन्होंने स्वयं सेवकों से आह्वान किया कि जन समुदाय को टीबी के बारे में बताएं। जन समुदाय को यह भी बताएं कि टीबी का बेहतर उपचार स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध है। रोग की जल्दी पहचान के लिए लक्षण नजर आने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं। पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाता है और नियमित रूप से दवा खाने के बाद रोगी पूरी तरह ठीक हो जाता है।
जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया – दो सप्ताह से अधिक खांसी या बुखार, खांसी के साथ बलगम या खून आना, रात में सोते समय पसीना आना, थकान और कमजोरी, वजन कम होना, सीने में दर्द रहना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से एक भी लक्षण नजर आने पर टीबी की जांच अवश्य कराएं। उपचार के दौरान बेहतर पोषण के लिए रोगी को हर माह पांच सौ रुपए की राशि दी जाती है यह राशि उसके बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है।
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