हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : हापुड़ के तीन नामी किताब विक्रेताओं उपाध्याय बुक डिपो, त्यागी बुक डिपो व कौशिक बुक डिपो की दुकान पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने हालही में छापा मारा और दुकान में अनाधिकृत प्रकाशन की किताबें मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। डीआईओएस ने कहा कि यदि दुकान में अनाधिकृत प्रकाशन की किताबें फिर से पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में दुकानदारों में हड़कंप मचा रहा और सभी इन अनाधिकृत प्रकाशन के स्टॉक को हटाने में जुट गए। दरअसल डीआईओएस यानी जिला विद्यालय निरीक्षक पीके उपाध्याय को सूचना मिली थी कि हापुड़ के कुछ दुकानदार एनसीईआरटी के अधिकृत प्रकाशन की किताबें न बेचकर अनाधिकृत प्रकाशनों की किताबें बेच रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में उपाध्याय बुक डिपो, त्यागी बुक डिपो व कौशिक बुक डिपो पर डीआईओएस ने छापा मारा जहां अधिकृत प्रकाशन के साथ-साथ अनाधिकृत प्रकाशन की किताबें भी पाई गई जो कई गुना महंगी बेची जा रही थी। ऐसे में डीआईओएस ने दुकानदारों को कड़ी चेतावनी दी और भविष्य में ऐसा न करने की हिदायत दी।
डीआईओएस ने कहा कि यदि भविष्य में दुकानदार ऐसा करते हुए पाए गए तो मुकदमा दर्ज करा कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि दुकानदार भारी मुनाफा कमाने के लिए अनाधिकृत प्रकाशनों की किताबें बेच रहे थे। एनसीईआरटी की जो किताब लगभग 50 रुपए की है, अनाधिकृत प्रकाशन की किताब की लगभग 150 रुपए है। दुकानदारों और प्रकाशनों की मिलीभगत से अभिभावकों को चूना लग रहा था। बताया जा रहा है कि यह किताबें मेरठ और गाजियाबाद से हापुड़ तक पहुंचती थी जहां से भारी मुनाफा कमाने के लिए छात्रों को बेचा जाता था। इस दौरान कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर कब से यह दुकानदार इन अनाधिकृत पब्लिशर्स की किताबें बेच रहे थे? कितना मुनाफा इन दुकानदारों ने कमाया? बता दें कि आगरा की श्री कैला जी बुक्स प्राइवेट लिमिटेड, झांसी की पितांबरा बुक्स प्राइवेट लिमीटेड व डायनामिक टेक्स्ट बुक्स प्रिंटर प्राइवेट लिमीटेड प्रकाशनों की किताबों को हापुड़ में बेचने के लिए अधिकृत किया गया है लेकिन यह दुकानदार अनाधिकृत प्रकाशनों की किताबें बेच रहे थे। फिलहाल एक सवाल लगातार उठ रहा है कि कब से दुकानदार यह किताबें बेच रहे थे और कितना मुनाफा इन दुकानदारों ने कमाया।























