हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ खनन के कारोबार व खपत की बड़ी मंडी बना है फिर भी प्रदेश सरकार को खनन के माल पर 18 प्रतिशत मिलने वाला जीएसटी नाममात्र का है। प्रदेश भर से सरकार को खनन कारोबार से मिलने वाला जीएसटी अत्यधिक कम होने से सरकार के कान खड़े हो गए है और इस धंधे में लिप्त कारोबारियों से बिल आदि एकत्र कर कड़ी निगरानी करने को कहा है।
उत्तर प्रदेश में खनन के माल का कारोबार तेजी से पनप रहा है और इस धंधे में लिप्त कारोबारी लग्जरी लाइफ जी रहे है औऱ सरकार को जीएसटी नाममात्र को दे रहे है। हापुड़ जनपद भी इससे अछूता नहीं है। हापुड़ में खनन के माल की बिक्री के ठिकाने दिल्ली रोड पर सबली गेट, रामलीला मैदान, पैट्रोल पम्प के पास, मेरठ रोड, स्वर्ग आश्रम रोड तथा गढ़ रोड पर सैकड़ों ठिकाने है, जहां ट्रैक्टर टालियों से खनन का माल खपत के ठिकानों पर भेजा जाता है।
हापुड़ जनपद में मोरंग, बालू, मिट्टी, रोडी, डस्ट, बदरपुर आदि राजस्थान व हरियाणा से रातों-रात हापुड़ लाया जाता है। बालू रेत गंगा खादर से तथा मिट्टी ग्रामीण इलाकों से लाई जाती है। खनन के माल को खपत के ठिकानों पर पहुंचाने के लिए ट्रैफिक रुल का उल्लंघन करने वाली हजारों ट्रैक्टर ट्रालियां लगी है, जो सड़कों पर दौड़ती नजर आ रही है। अब प्रदेश सरकार खनन कारोबारियों पर शिकंजा कसने का निर्णय लिया है।
मौस्ग, बालू और मिट्टी खनन से जुड़े ठेकेदारों व कारोबारियों पर गुड्स सर्विस टैक्स (जीएसटी) का शिकंजा कसने जा रहा है। ऐसे कारोबारियों का टर्नओवर जांचने के साथ ही जीएसटी जमा करने की स्थिति की जानकारी प्राप्त की जाएगी। प्रदेश में खनन मद में जीएसटी से मिलने वाली राशि कम है।
आयुक्त राज्य कर मिनिस्ती एस ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश भेजते हुए कहा है कि ऐसे लोगों की रिपोर्ट तैयार करते हुए शत-प्रतिशत जीएसटी की वसूली की जाए। सचल दल इकाई, विशेष अनुसंधान शाखा के साथ ही जोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे खनिज पदार्थों व खनन संबंधी सेवाओं में हो रही कर चोरी रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।
आयुक्त राज्य कर की ओर से भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि इन पर 18 फीसदी जीएसटी लेने की व्यवस्था है। इसलिए खनिज पदार्थों के परिवहन के दौरान सचल दल इकाइयों द्वारा इनके अधिकाधिक बिल एकत्र किए जाएं।
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