हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : राजस्थान के संत प्रवर श्री गोपाल मोहन भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन गुरुवार को कथा का रस पान कराते हुए कहा कि विश्व में भारतीय संस्कृति से श्रेष्ठ कोई संस्कृति नहीं है और ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका निदान न हो। समस्त समस्याओं का निदान श्रीमद्भागवत में निहित है और श्रीमद्भागवत समाधि भाषा का ग्रंथ है। समाधि में लिखा गया है और समाधि में गाया गया है।
संत प्रवर ने इस बात पर दुख जताया कि युवा पीढ़ी का झुकाव विदेशी संस्कृति और दुर्व्यसनों की ओर बढ़ रहा है जबकि विदेशी भारतीय संस्कृति को अपना कर भगवान श्री कृष्ण के आदर्शों का प्रचार-प्रसार करने में जुटे है। संत प्रवर ने महारास लीला, श्री कृष्ण मथुरागमन, उद्धव चरित्र व रुकमणी विवाह का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि ठाकुर के ये लीलाएं समाज में सबको साथ लेकर चलने का संदेश देती है कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। कर्म करना मानव का अधिकार है, फल की इच्छा रखना उसका अधिकार नहीं।
संत प्रवर के व्यास गद्दी पर विराजमान होने के बाद बिजेंद्र भाटी, प्रदीप सिंहल, राकेश शर्मा, गिरीश शर्मा, बीना गोयल, सरिता अग्रवाल, बरखा अग्रवाल, सुषमा सिंहल आदि ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। श्रीमद्भागवत कथा के मुख्य यजमान श्री शांति स्वरुप गोयल दम्पत्ति ने आरती के साथ कथा सम्पन्न कराई।
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