हापुड़,सीमन (ehapurnews.com): हमेंअपने सिकुड़ते परिवारों से बचकर पारिवारिक रिश्तों को आने वाले भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारिवारिक रिश्तों को बढ़ाना होगा।आज हमारे परिवारों से भाई-भाई,भाई-बहिन,चाचा,ताऊ,बुआ, मामा की रिश्ते धीरे धीरे समाप्त होते जा रहे जिसके कारण हिन्दू समाज का भविष्य खतरे में नज़र आ रहा है,इसके लिए हमें अपने रिश्तों को बढ़ाना चाहिए अर्थात परिवार को सीमित न रखकर बढ़ाना चाहिए।
दूसरा अपनी सामर्थ्य के अनुसार खेती की जमीन अवश्य रखनी चाहिए ,जो खेती स्वयं नहीं कर सकते वह दूसरों से कार्य कराए।यह भी भविष्य को सुरक्षित रखने का एक उपाय है।हमें अपने से दूर होते जा रहे एक बड़े वर्ग को भाई चारा बनाकर ,उसकी सहायता करते हुए अपने नज़दीक रखना होगा।तन,मन,धन से जिसके पास जितनी सामर्थ्य है उसे सामाजिक एकता बनाये रखने के लिए तैयार रहना चाहिए।हमें अपने आदत बनानी होगी कि यथा सम्भव अपने कार्य अपने वर्ग के व्यक्तियों से ही कराकर उन्ही मजबूत करें।
आर्य समाज हापुड़ के 131 वें वार्षिकोत्सव पर आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के महामंत्री विनय आर्य ने कहा कि इतिहास का चिन्तन करने पर मैं पूर्ण सच्चाई के साथ कह रहा हूँ कि जिस प्रकार स्वतंत्रता की लड़ाई एक मात्र महर्षि दयानंद जी व उनके आर्य समाज ने लड़कर स्वतंत्रता दिलाई थी ,उसी प्रकार आने वाले समय को सुरक्षित रखने के लिए आर्य समाज की ओर आना होगा।देश,धर्म,समाज के लिए जो कार्य आर्य समाज ने किए है और कर रहा है,करता रहेगा ऐसी सोच और किसी संघटन के पास नही है।हिन्दू समाज के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हम दृढ़ संकल्प हैं।
आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने अपने प्रवचन मे कर्म फल के सिद्धांत पर वेद मंत्रों की व योग दर्शन के माध्यम से बताया कि जीव अपने कृत्य कर्म के फल से बच नही सकता।निष्काम कर्म अर्थात ईश्वर को समर्पित मोच्छ को प्राप्त करने के लिए किए कर्म को कहते है।सकाम कर्म सांसारिक सुखों को प्राप्त करने के लिए किए गए कर्म को कहते है।सकाम कर्म प्रारब्ध और सिंचित दोनों प्रकार के होते है।यह अच्छे कर्म व बुरे कर्म दोनों का फल इसी जीवन मे तथा अगले जन्म में भोगना होता है।अतः मनुष्यों को भोग योनि से बचने के लिये निष्काम कर्म करना चाहिए।
डॉ अंजली आर्य ने ईश्वर भक्ति के ज्ञान वर्धक भजनों का रसास्वादन कराया।
कार्यक्रम का संचालन आर्य समाज के मंत्री अनुपम आर्य ने किया।





















