गढ़मुक्तेश्वर रोडवेज डिपो में कर्मचारियों को टीबी के प्रति किया जागरूक
डीटीओ ने कहा जांच और उपचार के लिए तत्पर है क्षय रोग विभाग
67 कर्मचारियों की हुई स्क्रीनिंग, लिये गए 12 कर्मचारियों के स्पुटम, होगी जांच
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़, 09 जनवरी, 2024। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान को धरातल पर उतारने के लिए क्षय रोग विभाग की फोकस्ड स्क्रीनिंग और जांच का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. सुनील कुमार त्यागी के कुशल निर्देशन और जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को क्षय रोग विभाग की टीम गढ़मुक्तेश्वर स्थित रोडवेज डिपो पहुंची। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक हेमंत मिश्रा और वरिष्ठ केंद्र प्रभारी गीता गुप्ता की मौजूदगी में टीम ने डिपो में रोडवेज कर्मचारियों का टीबी के बारे में संवेदीकरण करते हुए लक्षणों के बारे में जानकारी दी। बता दें कि विभाग इससे पहले जिले में पड़ने वाले सभी टोल प्लाजा और बाबूगढ़ स्थित अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन (डीएफएस) केंद्र पर फोकस्ड स्क्रीनिंग कर चुका है।
डीटीओ डा. राजेश सिंह ने बताया – जिले में सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत बस इस बात की है कि लक्षण नजर आने के साथ ही स्वास्थ्य केंद्र जाकर जांच करा ली जाए। उन्होंने कहा- कुछ लोग इस बात से डरते हैं कि टीबी की बीमारी की जानकारी होने से समाज उन्हें गलत दृष्टि से देखेगा। ऐसा नहीं है, टीबी की बीमारी भी अन्य बीमारियों की ही तरह है, और किसी को भी हो सकती है। यह बैक्टीरिया के कारण होती है। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू कर दिया जाता है।
डीटीओ ने बताया – छह माह के नियमित उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। बस, एक शर्त है उपचार बीच में न छोड़ें और दवा के साथ प्रोटीन और विटामिन युक्त पौष्टिक आहार लेते रहें। बीच में उपचार छोड़ने पर टीबी की सामान्य दवा काम करना छोड़ देती है और टीबी बिगड़ कर मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) हो जाती है। उस स्थिति में उपचार और लंबा हो जाता है।
जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया – क्षय रोगियों को पोषण सहायता के लिए निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत हर माह पांच सौ रुपए की राशि दी जाती है। इसके अलावा यह भी प्रयास किया जाता है कि क्षय रोगी को निक्षय मित्र से जोड़कर पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाए। जिला कार्यक्रम प्रबंधक दीपक शर्मा ने बताया – रोडवेज डिपो में करीब चार सौ कर्मचारी हैं, मंगलवार को कुल 67 कर्मचारियों की स्क्रीनिंग की गई और 12 कर्मचारियों का स्पुटम (बलगम का नमूना) जांच के लिए लिया गया। बाकी बचे कर्मचारियों की स्क्रीनिंग के लिए बुधवार को संवेदीकरण और स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया जाएगा। स्क्रीनिंग शिविर में एनसीडी काउंसलर प्रिंसी की देखरेख में कर्मचारियों की शुगर और बीपी की जांच की गई। कार्यक्रम में जिला पीएमडीटी समन्वयक मनोज कुमार गौतम, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक गजेंद्र पाल सिंह और वरिष्ठ लैब पर्यवेक्षक रामसेवक के साथ ही रोडवेज से कार्यालय सहायक अमरीश कुमार, इंद्रेश कुमार और रमन कुमार श्रीवास्तव का भी सहयोग रहा।
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