हापुड़, सीमन(ehapurnews.com): नव विक्रम सम्वत २०७९ के आरम्भ से पूर्व मेरठ रोड हापुड़ स्थित श्री शांतिस्वरूप कृषि इण्टर कॉलेज के भौतिक विज्ञान प्रवक्ता अजय कुमार मित्तल ने “ॐपञ्चाङ्ग” के नाम से हापुड़ जनपद के प्रथम पञ्चाङ्ग का प्रथम संस्करण जारी किया। इस पञ्चाङ्ग का लोकार्पण दोयमी स्थित काली मंदिर के महन्त पंडित संतोष कुमार अवस्थी जी ने प्रथम प्रति को माँ काली के चरणों में रख कर उनका आशीर्वाद दिलाते हुए किया। अजय कुमार मित्तल ने ज्योतिष विज्ञान में भी ‘आचार्य’ की उपाधि प्राप्त कर रखीहै। उन्होंने बताया कि यह नव सम्वत २०७९ चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा दिनांक २ अप्रैल २०२२ से चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या दिनांक २१ मार्च २०२३ तक रहेगा। उनके अनुसार हापुड़ से जारी होने वाला यह पहला चित्रापक्षीय पंचांग है जिसे भारतीय राष्ट्रीय पञ्चाङ्ग में हापुड़ के ही अक्षांश और रेखांश के आधार पर आवश्यक गणना करते हुए निर्मित किया गया है।
पञ्चाङ्ग प्रवर्तक अजय कुमार मित्तल और उनकी धर्मपत्नी रश्मि मित्तल ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हापुड़ व् आसपास के प्रमुख मंदिरों के महंतों को इस ॐपञ्चाङ्ग की एक एक प्रति भेंट की। चण्डी मंदिर के महंत प० राजेश्वर जी, मनसा देवी मंदिर के महंत प० सुधाकर दीक्षित जी, देवी मंदिर रेलवे रोड के महंत प० पुत्तानलाल जी, काली मदिर दोयमी के महंत प० संतोष कुमार जी, शिव मंदिर मुरादनगर के महंत प० दिनेश जी, सनातन धर्म हापुड़ के पुजारी जी आदि ने हापुड़ से पञ्चाङ्ग जारी होने पर हर्ष जताया और इस प्रयास के लिए अजय कुमार मित्तल की सराहना करते हुए इसके सफल होने की शुभकामनायें भी दी।
अजय मित्तल ने “ॐपञ्चाङ्ग” की विशेषता के बारे में बताया कि इसमें एक ही पृष्ठ पर प्रत्येक मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष के अलग अलग खण्डों में वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण को उनके दैनिक प्रारम्भ या समाप्ति काल के साथ भारतीय स्टैण्डर्ड समय में दर्शाया है। उसी पृष्ठ पर हापुड़ के अक्षांश के अनुसार सूर्य के उदय काल और उस दिन के दिनमान के साथ सूर्य आदि नव-ग्रहों की गोचर राशिगत स्थिति और उन राशियों में उनके भुक्त अंश और कला आदि को भी दर्शाया है। उसी पृष्ठ पर संगत तिथियों के आगे उस दिन के प्रमुख त्यौहार, सभी पाक्षिक एकादशी, प्रदोष व्रत काल, अयनांश, ऋतु निर्धारण हेतु सूर्य की सायन संक्रांति व् उसका प्रवेश काल, सूर्य की निरयण संक्रांति व् उसका प्रवेश काल, चन्द्रमा का प्रत्येक नव राशि में प्रवेश काल, भद्रा काल, पंचक काल, प्रमुख पर्वों के चंद्रोदय काल, वर्ष में घटित होने वाले सूर्य-ग्रहण व् चंद्र-ग्रहण आदि भारतीय स्टैण्डर्ड समय के साथ दर्शाये गए हैं। उन्होंने बताया कि इस पञ्चाङ्ग में वर्ष भर घटित होने वाले ग्रहों के अस्त उनके वक्री होने का प्रवेश और समाप्ति काल तथा साथ ही गण्डमूल नक्षत्रों का भी प्रवेश व् समाप्तिकाल दर्शाया गया है।
अजय मित्तल ने यह भी बताया कि इन महत्वपूर्ण जानकारियों के अतिरिक्त “ॐपञ्चाङ्ग” में षटकूट चक्र, महर्षि पाराशरोक्त विंशोत्तरी दशा चक्र, शिवोक्त योगिनी दशा चक्र, गोचर के ग्रहफल का बोध चक्र, वैवाहिक सम्बन्ध के समय विचारणीय अष्टकूट चक्र और उससे सम्बंधित गुण-मेलापक सारणी, वैवाहिक मुहूर्त में विचारणीय लत्तादि दस दोषों आदि का भी उल्लेख है। इनके साथ साथ ॐ पञ्चाङ्ग में नव ग्रहों से सम्बंधित बीज मन्त्र, रत्न, आधार धातु, तिथि, वार, नक्षत्र, और वनस्पति का भी उल्लेख है। पञ्चाङ्ग प्रवर्तक के अनुसार प्रथम संस्करण में सभी आवश्यक जानकारियों को दर्शानें का प्रयास किया गया है। अगले संस्करण में और भी आवश्यक और महत्वपूर्ण जानकारयों को भी समावेशित किया जायेगा।
पञ्चाङ्ग निर्माण में अजय कुमार मित्तल की धर्मपत्नी रश्मि मित्तल और पुत्र हर्शल मित्तल का भरपूर सहयोग रहा।
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