हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): उत्तर प्रदेश में अब ट्रैक्टर ट्रालियों का उपयोग व्यवसायिक गतिविधियों में नहीं हो सकेगा। सिर्फ कार्य में ही इस्तेमाल की जा सकती है और वह भी पंजीकरण के बाद।
ट्रालियों का इंश्योरेंस कराना होगा और निर्माता को आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान से डबल एक्सेल यानि चार पहियों की ट्राली की डिजाइन की अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही चार पहियों की ट्राली बना सकेगा। दो पहियों की ट्राली न बनेगी और न ही पंजीकृत की जाएंगी। इन प्रमुख बिंदुओं को प्रदेश में ट्रैक्टर-ट्राली से होने वाले हादसों पर रोक लगाने के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। शासन से रिपोर्ट पर मुहर लगते ही इस प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
बता दें कि गत दिनों कानपुर, लखीमपुर खीरी में हुए सड़क हादसों के प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि जनपद हापुड़ में हजारों ट्रैक्टर ट्रालियां व्यवसायिक कार्यों में इस्तेमाल हो रही है और अनेक बार ट्रैक्टर ट्रालियां सीमेंट, रेत, रोडी, बदरपुर, डस्ट, सब्जी, लोहा, सरिया, ईंट, मलवा आदि कार्यों में लगी है।
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