हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : राजस्थान के संत प्रवर श्री गोपाल मोहन भारद्वाज जी महाराज ने रविवार को हापुड़ में कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के सात दिन श्रवण करने से जो जागृति आती है, उससे भक्तिरस उत्पन्न होता है और भक्ति रस ही मानव को प्रभु से मिलाता है। प्रभु के रंग में रंग कर ही सर्वत्र मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
संत प्रवर श्री गोपाल मोहन भारद्वाज जी महाराज श्री राधाकृष्ण संकीर्तन मडंल हापुड़ के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं को भक्तिरस का रसपान करा रहे थे। संत ने कहा कि जो भी भक्त आदर और श्रद्धा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करता है, वह अमर हो जाता है। श्रीमद् भागवत मोक्ष देने वाली अमर कथा है। यह प्रभु प्राप्ति का ही श्रेष्ठ साधन है।
कथा व्यास श्री गोपाल मोहन जी महाराज ने भक्तों को परीक्षित कथा, कलयुग दमन, श्री शुकदेव जी का आगमन कथा का अमृतपान कराया। श्री शुकदेव जी ने राजा परीक्षित से पूछा कि स्वर्ग का अमृत पीना चाहते हो अथवा कथा अमृत। राजा द्वारा पूछने पर श्री शुकदेव जी ने दोनों का अंतर स्पष्ट किया और कहा कि स्वर्ग का अमृत पीने से सुख तो मिलता है, परंतु पापों का क्षय नहीं होता है जबकि कथा का अमृतपान करने से पापों का नाश होता है। महाराजा परीक्षित ने महर्षि शुकदेव जी से शुक्रताल में वट वृक्ष के नीचे हजारों ऋषियों व मुनियों के बीच बैठकर सात दिन तक श्रीमद् भागवत कथा का अमृत पान किया था।
श्री राधाकृष्ण संकीर्तन मंडल हापुड़ की अगुवाई में श्रीमद् भागवत कथा 16 सितम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 7 बजे तक तुलाराम की धर्मशाला में चल रही है। कथा के मुख्य यजमान श्री शांतिस्वरुप गोयल दम्पत्ति है। संस्था के प्रधान अनिल गोयल, देवेंद्र कुमार सक्सेना, सचिव कमल किशोर अग्रवाल, प्रदीप सिंहल, शिवकांत गर्ग, अजय सैनी, बिजेंद्र सिंह भाटी, शरद अग्रवाल, चुन्नी लाल कनोडिया आदि ने संत प्रवर का माल्यार्पण कर स्वागत किया। महिलाओं में सविता, गीता, सरिया, कुमुद द्वारा आचार्यवर का स्वागत किया गया। आज के प्रसाद की व्यवस्था गीता स्याना बुलंदशहर द्वारा की गई।

























