हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : रक्षाबंधन पर्व को लेकर महिलाओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हापुड़ में भौतिकी प्रवक्ता अजय मित्तल ने रक्षा बंधन पर्व पर स्थिति को स्पष्ट किया है।
जानें- १- 11अगस्त 2022 को भद्रा है तथा 12 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सूर्योदय (प्रातः 05:46) से केवल 1 घंटा 19 मिनट के लिए (प्रातः 07: 05 तक) है जो कि उस दिन त्रय-मुहूर्त के लिए आवश्यक 2 घण्टे 39 मिनट से कम है। अतः त्रय-मुहूर्त काल की अल्पता के कारण यह पर्व किसी भी रूप में 12 अगस्त को मनाया जाना असंगत है।
२- प्रत्येक रक्षाबन्धन के पर्व पर चतुर्दशी तिथि की समाप्ति से पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्ध तक विष्टि करण रहता है जिसके कारण भद्रा काल तो होता है लेकिन मुहूर्त मार्तंडानुसार मकर राशिगत चन्द्रमा के कारण यह अधोमुखी और पाताललोक वासी होकर शुभकारी रहती है। इसलिए भद्रा दोष नहीं रहता। साथ ही दिन में प्रारम्भ भद्रा रात में समाप्त हो रही है, इसलिए भी भद्रा दोष नहीं है।
फिर भी, यदि भद्रा का दोष मानें, तो 11 अगस्त को पूर्णिमा प्रातः 10:38 से प्रारम्भ है, अतः भद्रा काल प्रातः 10:38 से रात्रि 08:51 तक रहेगा। इसलिए रक्षा बन्धन का पर्व रात्रि 08:51 से मनाना चाहिए लेकिन तब यह भी ध्यान रहे कि पर्व निशीथ काल से पूर्व सम्पन्न हो जाना चाहिए। (11 अगस्त को निशीथ काल सूर्यास्त 07:04 के बाद प्रदोष को मिलाकर कुल 5 घंटे 20 मिनट तक अर्थात रात्रि 12:24 तक रहेगा। यह समय प्रतिदिन परिवर्तित होता रहता है।)
३- ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर यह पर्व प्रदोष काल के उत्तरार्द्ध से निशीथ काल तक मनाया जा सकता है। (प्रदोष काल का उत्तरार्द्ध 11 अगस्त को सूर्यास्त सायं 07:04 से 1 घंटा 20 मिनट बाद से प्रारम्भ होगा।)
विदित रहे कि रक्षाबंधन का पर्व सूर्योदय कालिक न होकर अपराह्न कालिक होता है। इस प्रकार भद्रा दोष के आधार पर रक्षाबन्धन का पर्व 11 अगस्त 2022 को रात्रि 08:24 से रात्रि 12:24 तक मनाना सर्व उपयुक्त एवं शुभ होगा। शास्त्रानुसार 12 अगस्त को कदापि नहीं।
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