हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): एस0एस0वी0 कॉलिज, हापुड के अंग्रेजी विभाग में ‘‘चासर टू मिल्टन’’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें एम0ए0 अंग्रेजी प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने अपने पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के आरम्भ में संगोष्ठी की आयोजिका डॉ0 रानी तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर अंग्रेजी विभाग ने संगोष्ठी के विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि महाकाव्य काव्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विधा है। अंग्रेजी साहित्य के इतिहास पर नजर डालें तो देखेंगे कि जेफ्री चासर से जॉन मिल्टन के साहित्य काल में कुछ बहुत उत्कृष्ट महाकाव्योंकी रचना हुई। महाकाव्यों में जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, जीवन की समग्रता का कलात्मक ढंग से वर्णन किया जाता है। भारतीय लेखकों के साथ-साथ यूरोपीय देशों के लेखको ने भी इस विद्या में उत्कृष्ट ग्रंथों की रचना की।
अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 आर0के0 शर्मा ने महाकाव्यों की विशेषताऐं जैसे उदान्त उददेश्य, महान नायक, प्रकृति एवं युग चित्रण, रस भाव, उत्कृष्ट एवं कलात्मक शैली, अलंकारों का भावानुकूल प्रयोग आदि पर चर्चा की। छात्रा सायमा ने अपने पत्र के माध्यम से बताया कि जॉन मिल्टन का पैराडाइस लॉस्ट महाकाव्य संक्षेप में विषय वर्णन के साथ शुरू होता है कि मानव ईश्वरीय आज्ञाभंग अपराध के फलस्वरूप किस प्रकार स्वर्ग से वंचित हो जाता है। गुड़िया ने पुनर्जागरण युग के एक महान लेखक, दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विचारों वाले व्यक्ति फ्रांसिस बेकन पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। योगिता ने बताया कि बेकन के लेखन की अपनी एक विशिष्ट शैली थी। वे वाक्यों की संक्षिप्तता के व्यापक अर्थ देने वाले निबंध की रचना करते थे। ललिता ने बेकन के निबंध ‘‘ऑफ स्टडीज’’ पर अपना पत्र प्रस्तुत किया और बताया कि इस निबंध में बेकन अध्ययन करने के लिए प्रेरित करते हैं। पूजा ने बताया कि बेकन के अनुसार सत्य एक उज्जवल दिन की तरह होता है, जो सच्चाई के दर्शन करवाता है।
वर्षा ने अपने पत्र के माध्यम से बताया कि 14वीं शताब्दी के लेखक जेफ्री चॉसर के साथ ही अंग्रेजी साहित्य में आधुनिक युग का प्रारंभ माना जाता है। महिमा ने कहा कि चॉसर की रचनाएं साहित्य के अतिरिक्त जीवन के व्यापक क्षेत्र में नए मोड का संकेत करती है। भरत ने अपना पत्र सर फिलिप सिडनी पर प्रस्तुत किया एवं बताया कि उन्होंने अपनी रचना ‘‘कविता के लिए एक माफी’’ में कला के बीच अपनी सही जगह पर कविता को पुनर्स्थापित करने की कोशिश की है। आकांक्षा एवं रेहान ने 14वीं शताब्दी इंग्लैण्ड में ब्लैक डेथ (प्लेग महामारी) के विषय में बताया। आरती तेवतिया ने अंग्रेजी पुनर्जागरण थियेटर पर अपना पत्र प्रस्तुत किया एवं बताया कि इस समय के प्रमुख लेखक थे विलियम शेक्सपियर, क्रिस्टोफर मार्लो एवं बेन जॉनसन। इस संगोष्ठी में नेहा, सिमरन, अंशिका, चारू वर्मा, चिन्की, सदफ, प्राची, एलिशा, ऋचा, निखिल आदि ने अपने पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में विभाग की डॉ0 रूचि अग्रवाल, देवेन्द्री गौड़, सुष्मिता कौशिक एवं रजनी अग्रवाल उपस्थित रहीं। आयोजन में श्री भीम सिंह का सहयोग रहा। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 सतीश कुमार ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया एवं अंग्रेजी विभाग की सराहना की।
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