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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मिली नई पहचान
हापुड, सूवि(ehapurnews.com):शिक्षा एम०ए० एल०एल०बी०दिलकश जहाँ पुत्री श्री फुरकत अली,उम्र 28 वर्ष
ग्राम पंचायत का नाम सलाई
ब्लाक का नाम हापुड़ समूह का नाम :–खुशी स्वयं सहायता समूह
सी०एल०एफ० का नाम:– गरिमा महिला प्रेरणा संकुल समिति जसरूपनगर
- समूह में जुड़ने की समय की स्थिति समूह में जुड़ने से पहले मैं एक विद्यार्थी थी। मैं अपने भवष्यि को लेकर काफी चिन्तित रहती थी कभी कभी मेरे मन में ऐसा विचार आता था, कि मैं इस गरीबी से कैसे बाहर निकलें। मैं चाहती थी कि मैं कोई ऐसा कार्य करू जिससे मेरा समाज में नाम और मान सम्मान मिले व अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयोग कर सकूँ। मुझे एक मौके की तलाश थी और वह मौका मुझे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने दिया जिसकी मैं सदा आभारी रहेंगी।
- समूह में कैसे जुड़ी एक दिन हमारी ग्राम पंचायत में आई०सी०आर०पी० दीदीयों के साथ ब्लाक से आये ब्लाक मिशन प्रबन्धक श्री मनीष कुमार व वीरेन्द्र कुमार आये। जो एक बैठक में गरीब और वचित महिलाओ को समूह में जोड़कर सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के बारे में विस्तार से समझा रहे थे। मुझे उनकी बाते सुनकर बहुत कुछ अच्छा लगा और मैने भी समूह में जुड़ने का निश्चय किया। तब मुझे नही पता था, कि समूह में जुड़ने से मेरे जीवन में इतना बड़ा परिवर्तन आ जायेगा।3. समूह में जुड़ने के बाद की स्थिति-समूह में जुड़ने के बाद मेरे जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ जहा एक तरफ मैं बहुत निराश हो चुकी थी वही दूसरी तरफ जब मैं समूह से जुड़ी मुझे लगा कि मेरा जीवन सार्थक हो रहा है। मेरी जीवन शैली में सुधार होने लगा मैं घर से बाहर निकलकर समूह/ग्राम संगठन / सी०एल०एफ० की बैठक में जाती तब मुझे लगता कि मेरे सपनों को नई उडान मिल गई हम समूह की दीदीयों एक दूसरे के दुख दर्द को समझती ओर किसी एक के साथ हो रही समस्याओ का मिलकर सामना करती इस तरह हमारा आर्थिक विकास हो रहा था। जिसके साथ साथ सामाजिक विकास भी हो रहा था।
- हैण्ड मेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी से जुड़े कार्य मैने अपने स्वयं सहायता समूह से 100000 रू० लेकर हैण्ड मेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी का कार्य किया* मेरे समूह में 11 सदस्य है, जो सभी मिलकर हैण्ड मेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने का कार्य करते है। मैं अपने जिले व अन्य प्रदेशों के सरस मैलो में प्रतिभाग करती हूँ। और समूह द्वारा तैयार हैण्ड मेड आर्टिफिशियल ज्वैलरी स्टाल लगाकर विक्रय करती हूँ। जिससे मेरे समूह को प्रतिवर्ष लगभग 300000 रू0 से 400000 रू० समूह को आमदनी हो जाती है। जिससे समूह की सभी दीदीयों काफी खुश है।
- परिवार की आय
मेरे परिवार की आमदनी सालाना आय 400000 रू0 से 500000 रू0 की वार्षिक आय हो जाती है।6. आभार- मैं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का आभार व्यक्त करती हूँ कि मुझे मा० प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का दिल्ली में दिनांक 11.03.2024 को मंच का संचालन करने का मौका मिला मैने कभी सपने में भी नही सोचा होगा की मा० प्रधानमंत्री जी का मंच संचालन करूंगी, जहाँ मुझे कोई नही जानता था। परन्तु अब मुझे जनपद ही नही भारत वर्ष में मुझे लोग जान गये है। मैं मिशन का एवं मिशन के अधिकारियो का और सबसे पहले मां० प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद देती हूँ जिनके द्वारा इतनी अच्छी योजना का संचालन कराकर गरीब दीदीयो को लखपति दीदी बनाने का कार्य किया।
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