
अपरा एकादशी 13 मई बुधवार को, ज्योतिर्विद पं. सुबोध पाण्डेय से प्रीति व विषकुंभ योग के बारे में जाने
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा के प्रदेशाध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने बताया अपरा एकादशी 13 मई2026 बुधवार को प्रीति योग
(रात 8:55 बजे के बाद) और विषकुंभ योग रहेगा। यह ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे अचला एकादशी भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है!एकादशी तिथि 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे से शुरू होकर 13 मई, दोपहर 1:29 बजे तक रहेगी, इसलिए उदयातिथि के अनुसार व्रत 13 मई को रखा जाएगा ! व्रत का पारण 14 मई 2026 को किया जाएगा। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार पारण समय सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे के बीच है, और द्वादशी तिथि 14 मई, सुबह 11:20 बजे समाप्त होगी व्रत 13 मई 2026, बुधवार एकादशी तिथि: 12 मई, दोपहर 2:52बजे से 13 मई,दोपहर 1:29 बजे तक
व्रत पारण14 मई 2026 प्रातः5:31बजे से प्रातः 8:14 बजे के बीचअपरा एकादशी का महत्व बहुत अधिक माना गया है। यह व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है और परंपरा के अनुसार इसे पाप-नाशक, पुण्यदायक और विष्णु-कृपा प्रदान करने वाला व्रत माना जाता हैं !यह व्रत मन की शांति और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता हैं ! मान्यता है कि इसके पुण्य से बड़े पापों का नाश होता है, जैसे ब्रह्महत्या, परनिंदा, और प्रेत योनि से मुक्ति अपरा एकादशी का पालन करने वाले को समृद्धि, सुख, यश और विष्णु लोक की प्राप्ति का फल बताया गया हैं !शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि यह एकादशी बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली है और इसका फल अत्यंत महान माना जाता है ।कुछ स्रोत इसे अचला या अजला एकादशी भी कहते हैं !अपरा एकादशी को ऐसा व्रत माना जाता है जो आत्मिक शुद्धि, पापों से मुक्ति, शांति और पुण्य देने वाला हैं !अपरा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है इस व्रत की पूजा विधि सरल लेकिन निष्ठापूर्ण होनी चाहिए दशमी तिथि (एक दिन पहले) के सूर्यास्त के बाद भोजन न करें।और ब्रह्मचर्य का पालन करें !एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान के पानी में गंगाजल या तिल मिलाकर स्नान करें।
साफ कपड़े पहनकर मंदिर में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें एक लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें !हाथ में फूल और तिल लेकर व्रत का संकल्प लें भगवान विष्णु को अक्षत, पान, सुपारी, लौंग, मिठाई, रोली और फूल-माला अर्पित करें! धूप और दीप प्रज्वलित करें ! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें! शाम को पुन: भगवान की पूजा करें और एकादशी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और हुई किसी भी भूलचूक के लिए क्षमा याचना करें! पूरे दिन उपवास रखें, यदि संभव न हो, तो शाम को एक बार फलाहार (कुट्टू या सिंघाड़े का आटा आदि) कर सकते हैं !इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता हैं !दिन में सोना नहीं चाहिए और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए !अगले दिन (द्वादशी) शुभ समय पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर या दान देकर व्रत का पारण करें!अपरा एकादशी के दिन रेवती नक्षत्र के बाद प्रीति योग (रात 8:55 बजे के बाद) और विषकुंभ योग रहेगा। यह ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे अचला एकादशी भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित हैं !
श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा (रजि.)
प्रदेशाध्यक्ष
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
संपर्क सूत्र 9634408321
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