
जीएस यूनिवर्सिटी में गर्भसंस्कार कार्यशाला का आयोजन
हापुड़, सीमन /रियाज अहमद(ehapurnews.com): हापुड़, उत्तर प्रदेश | 25 अप्रैल 2026 को GS University में “प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम: एपिजेनेटिक्स एवं भ्रूण विकास” विषय पर एक गर्भसंस्कार कार्यशाला का सफल आयोजन विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में किया गया।
यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल एवं प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) रुपाली शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को डायरेक्टर सोनाली शर्मा (जीएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज) एवं प्राचार्या प्रो. (डॉ.) भावना सिंह (जीएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज) का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
कार्यशाला की वक्ता वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता सारस्वत (एम.बी.बी.एस., एम.एस.) द्वारा किया गया। उन्होंने भ्रूण विकास, जीन अभिव्यक्ति, हार्मोनल संतुलन तथा मातृ स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर गर्भसंस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि “मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही करता है और अंततः वैसा ही बन जाता है।” गर्भसंस्कार के माध्यम से “आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी” का संदेश दिया गया। गर्भावस्था के दौरान माता का आहार, विचार और व्यवहार सीधे तौर पर गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित करता है। माता जैसा सोचती है, जो कार्य करती है, उसी प्रकार के भाव एवं संस्कार संतान में विकसित होते हैं।
भारतीय परंपरा में अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए बताया गया कि उन्होंने गर्भ में ही चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त किया था, जो गर्भसंस्कार की महत्ता को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम का आयोजन जीएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा जीएस मेडिकल कॉलेज द्वारा संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग, बाल रोग, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी एवं पीडियाट्रिक्स विभागों की सक्रिय भागीदारी रही।
आयुर्वेद एवं एमबीबीएस के संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं इंटर्न्स ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन एक इंटरएक्टिव सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए।
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