
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): वैसे तो जनपद हापुड़ के शहरी व ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति व जर्जर तारों से लोग परेशान हैं और औद्योगिक उत्पादन व फसलों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। बिजली के खिलाफ उद्यमी व किसान आए दिन प्रदर्शन करते रहते हैं, परंतु बिजली विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो चुकी हैं, कि कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं हैं। जनपद के पौराणिक तीर्थस्थल गढ़मुक्तेश्वर के हालात तो कुछ ज्यादा ही बदतर हैं।
सरकार द्वारा बिजली व्यवस्था को चाक चौबंद करने के उद्देश्य से आरडीएसएस योजना चलाई हुई हैं जिसके तहत गढ़ डिवीजन क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को चाक चौबंद करने के उद्देश्य से करीब बीस करोड़ की रकम खर्च की गई थी। संबंधित योजना के दौरान जड़ खोखली होने से जर्जर होकर हादसों को न्योता दे रहे करीब एक हजार खंभों को बदलते हुए दर्जनों नए ट्रांसफार्मर लगाकर दर्जनों की क्षमता भी बढ़ाई गई थी। पचास किलोमीटर से भी अधिक लंबाई वाली जर्जर हो रही बिजली लाइन के तार बदलने और नया फीडर का काम भी किया गया था। परंतु इतना सब कुछ होने के बाद भी लाइन में फाल्ट से लेकर ओवक लोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर फुंकने और बिजली व्यवस्था चौपट होने की जन समस्या से अपेक्षित स्तर पर कोई भी निजात मिल पानी संभव नही हो पा रही हैं।
गढ़ ब्रजघाट गंगानगरी में छोटे बड़े कई धार्मिक मेलो के साथ ही प्रतिमाह अमावस्या पूर्णिमा पर लाखों गंगा भक्तों की भीड़ जुटती हैं। सावन और फाल्गुन माह में लाखों शिवभक्त कावड़ लेकर आते जाते हैं। परंतु गंगानगरी से लेकर आवागमन से जुडें मुख्य रास्तों के किनारे लगे अधिकांश ट्रांसफार्मर फाउंडेशन की बजाए जमीन पर रखे हुए हैं जिनके इर्दगिर्द बेरिकेडिंग की भी कोई व्यवस्था नहीं हैं जिससे हर समय अनहोनी घटना होने की आंशका बनी रहती हैं परंतु इसके बाद भी ऊर्जा निगम अपने दायित्व को निभाने की बजाए महज औपचारिकता निभाकर पल्ला झाड़ता आ रहा हैं।
गढ़ ब्रजघाट गंगानगरी समेत ग्रामीण अंचल में भी कई मुख्य स्थानों में लगे खंभों पर तारों का जाल लटका हुआ हैं, जिससे बंदरों द्वारा उछलकूद करने के दौरान हर समय अनहोनी घटना होने का डर बना रहता हैं। परंतु सारी हकीकत सामने होने के बाद भी ऊर्जा निगम इस समस्या का समाधान कराने में पूरी तरह विफल हैं।
























