
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): विवाहित स्त्रियों के अखंड सौभाग्य एवं पति के उन्नति व सफलता के साथ अविवाहित कन्याओं के सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए किया जाने वाला निर्जला हरितालिका व्रत 26 अगस्त मंगलवार को रखा जाएगा तथा गणपति स्थापना 27 अगस्त बुधवार को किया जाएगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के० सी० पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि तीज व्रत में महिलाएं बिना अन्न -जल ग्रहण किए हुए प्रदोषकाल शुभ बेला में स्वयं का श्रृंगार कर भगवान शिव- पार्वती जी की पूजाकर अखंड सौभाग्यवती होने की प्रार्थना करेंगी तथा 27 अगस्त को पारण करेंगी 26 अगस्त को तृतीया के साथ चतुर्थी तिथि का संयुक्त योग होने से कई गुना अधिक शुभफल प्राप्त होगा परन्तु सायंकाल में चतुर्थी तिथि प्राप्त होने से चन्द्र दर्शन निषेध रहेगा पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेशजी ने चंद्रमा को श्राप दिया था इसलिए यदि आज किसी ने चन्द्रमा को देख लिया तो उसके ऊपर मिथ्या (झूठा) आरोप निश्चित लगता है अपयश मिलता है 26 अगस्त को चन्द्रोदय सुबह 8.08 बजे तथा चंद्रास्त रात 8.06 पर होगा इस दिन इस बीच गलती से भी चन्द्रमा देख ले तो ‘सिंहः प्रसेनमव.’ इस मंत्र का जप करें तथा विष्णु पुराण में वर्णित स्यामंतक मणि की कथा भी श्रद्धा से पढ़े या सुने तथा विघ्नहर्ता मंगलकर्ता भगवान गणपति जी के 10 दिनोंतक चलने वाले गणेशोत्सव का प्रारम्भ 27 अगस्त बुधवार गणपति स्थापना के साथ होगा प्रथम पूज्य भगवान श्री गणपति को विद्या, बुद्धि , विघ्नहर्ता, मंगलकारी, रक्षाकारक,रिद्धि- सिद्धि , समृद्धि, शक्ति और सम्मान देने वाले भगवान के रूप में पूजन किया जाता है भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त को अपरान्ह बाद 1.54 बजे से प्रारम्भ होकर 27 अगस्त बुधवार को दोपहर बाद 3.44 तक रहेगा 27 अगस्त को चन्द्रोदय सुबह 9 बजे तथा चन्द्रास्त रात 8.36 बजे होगा निर्णयसिंधु, ब्रह्मवैवर्त के अनुसार भगवान गणपति का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के मध्यान्ह काल हुआ था अतः 27 अगस्त को उदयातिथि चतुर्थी के साथ बुधवार मध्यान्ह प्राप्त होने से शुभ योग, शुभ चौघड़िया में सुबह 10.45 बजे से दोपहर 12.22 के बीच स्थिर लग्न, शुभ होरा में गणपति स्थापना करना अत्यंत शुभकारी होगा 27 अगस्त को सूर्योदय के साथ हस्त नक्षत्र एवं सर्वार्थ सिद्धि होने से सुबह से ही लगातार 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव में गणपति बप्पा अनेक पूजा पंडालो के साथ घर घर में विराजेंगे तथा महोत्सव समापन गणपति जी की विदाई 6 सितंबर शनिवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा अशुभ फल से बचने व शुभ फल प्राप्ति के लिए सुबह 7.15 से 8.50 यमगण्ड काल एवं दोपहर 12.22 बजे से 1.59 तक राहुकाल में गणपति स्थापना नहीं करना चाहिए अन्य समय में शुभ लग्न मुहूर्त देखकर स्थापना कर सकते है गणेश जी को पूजन में हल्दी की माला, दूर्वा, रोली, कलावा, जनेऊ, मोदक, पान, सुपारी, केला, लौंग, इलायची अवश्य अर्पित करें गणेशजी को तुलसीदल नहीं चढ़ाना चाहिए मिट्टी से बने हुए भगवान श्री गणेशजी जिनकी सूढ़ दाहिनी ओर घूमी हुई हो सिद्धिविनायक कहे जाते है स्थापित करना चाहिए जो समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करते है स्थापना के समय ॐ गं गणपतये नमः का जप भी करते रहे तथा प्रारम्भ में मंत्र –
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ज्योतिर्विद पंडित के० सी० पाण्डेय
अध्यक्ष
भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा
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