
खनन अधिकारी द्वारा खनन ठेकेदार की गाड़ी प्रयोग करने का मामला: शासन ने मांगी रिपोर्ट
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हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ के जिला खनन अधिकारी प्रशांत कुमार द्वारा खनन करने वाली कंपनी की गाड़ी का इस्तेमाल करना कई सवाल खड़े करता है। मामले में अब शासन के सचिव ने रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में जिला खनन अधिकारी और ठेकेदार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है। जिला खनन अधिकारी फिलहाल बेचैन हैं जिन्हें प्राइवेट नंबर की खनन ठेकेदार की गाड़ी का प्रयोग करना भारी पड़ सकता है। हालांकि मामले में जिलाधिकारी ने भी स्थानीय स्तर पर इस मामले की जांच कराने की तैयारी की है। यह मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा जो लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। हापुड़ से लेकर लखनऊ तक यह विषय चर्चा में है। अब ऐसा लगता है कि इसकी गूंज दिल्ली तक भी सुनाई देगी। मामले की गहनता से जांच पड़ताल होनी चाहिए। हालांकि जिला खनन अधिकारी प्रशांत कुमार का कहना है कि कार को किराए पर लिया गया था। इसका नियमित किराया भी दिया जा रहा था। आप ही सोचिए कि यदि गाड़ी का नियमित किराया दिया जा रहा था तो ऐसे में यह कैसे संभव है? क्योंकि यह गाड़ी प्राइवेट नंबर की है जबकि कमर्शियल वाहन पर पीले नंबर की प्लेट लगी होती है। अधिकारियों का मामले में लिप्त जिम्मेदारों की भूमिका और संपत्ति की गहनता से जांच करनी चाहिए।
हाल ही में यातायात प्रभारी छविराम ने क्षेत्र में अपनी टीम के साथ चेकिंग अभियान चलाया। उस दौरान प्राइवेट नंबर की हापुड़ की सफेद रंग की प्राइवेट गाड़ी को यातायात प्रभारी और उनकी टीम ने रुकने का इशारा किया। गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ था। अचम्भे की बात तो यह है कि गाड़ी पर नंबर प्लेट ही नहीं लगी थी। ऐसे में यातायात प्रभारी ने गाड़ी का ₹5000 का चालान किया। जांच में पता चला कि यह गाड़ी तो जनपद के महत्वपूर्ण पद पर विराजमान जिला खनन अधिकारी इस्तेमाल कर रहे थे। भले ही इसका नियमित रूप से किराया दिया जा रहा हो लेकिन हापुड़ की खनन करने वाली बड़ी कंपनियों में से एक खालसा अर्थ मूवर्स की कंपनी का खनन विभाग में इस तरह गाड़ी लगना कई सवाल खड़े करता है। वहीं प्राइवेट नंबर की गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार भी लिखा हुआ था जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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