
अतिक्रमण से जन्मी जनसमस्याएं
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): नगर में बढ़ते हुए अतिक्रमण ने न केवल मार्गों को संकुचित कर दिया है, बल्कि जल भराव जैसी समस्याओं को भी जन्म दिया है, जिस कारण नगर में चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है और लोग वायरल की चपेट में हैं।
नगर के मध्य से होकर दिल्ली गढ़ रोड मार्ग गुजरता है, जहां से हर वक्त हल्के व भारी वाहन गुजरते हैं। इस मार्ग पर न तो यातायात नियमों का पालन होता हुआ दिखाई देता है और न ही अतिक्रमणकर्ताओं में पुलिस और प्रशासन का भय।
गांव अच्छेजा से लेकर गांव ततारपुर तक तीन किलो मीटर लंबा मार्ग बुरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है। पुलिस व प्रशासन जब भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाती है, उसे सड़कों पर दुकानों के आगे पड़े हुए स्टूल, बैंच व टीन शेड तथा होर्डिंग व ठेले-खोमचे वाले तो दिखाई देते हैं, परन्तु सड़कों पर ट्रैक्टर ट्रालियों व ट्रक बाडी का निर्माण, रोड़ी, बदरपुर, रेत, सीमेंट का धंधा तथा लंबे-लंबे सरियों के ढेर, लकड़ियों के मोटे-मोटे लट्टे, बांस-बल्ली दिखाई नहीं देते। धंधेबाज नालों को पाट कर उसका व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं, यह भी दिखाई नहीं देता। अतिक्रमण के कारण वर्षा व गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है और सफाई धरी रह जाती है। पृष्ठ 6,13/8/11 बुरी तरह अतिक्रमण की चपेट में हैं, बुलंदशहर रोड, गोले मार्किट भी जहां से पैदल भी निकलना दूभर हो जाता है। इन बाजारों में आए दिन जल भराव की समस्या से नागरिकों को जूझना पड़ता है। नाले व नालियां दुकानों व मकानों के भीतर से होकर गुजर रहे हैं, जो सफाई में सबसे बड़े तथा अधिक ग्राहकी होने से रेलवे बाधक बने हैं। बढ़ती हुई कीमतों रोड भी धंधेबाजों से नहीं बचा है। रेलवे रोड की पैदल पटरियों पर ठेले-खोमचे वाले, अंडे, मांस, सोफ्टी, छोले भटूरे, मसाला डोसा तथा फल विक्रेताओं ने बिना किसी भय के अतिक्रमण कर लिया है और एक-एक लाख रुपए तक की पगड़ियों . का लेन-देन हो रहा है। भट्टियों से निकलने वाली राख तथा दोने, पत्तल, गिलास व शराब की खाली बोतलें, गंदगी आदि नाले में धंधेबाज बहा देते हैं, जो जल निकासी में बाधक बनते हैं। जल भराव से मक्खी, मच्छर पैदा हो रहे हैं।
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