मेरठ से फैक्ट्री में लाया गया था अनुदानित यूरिया, मुर्गी दाना बनाने वाली अन्य फैक्ट्रियां रडार पर
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): जनपद हापुड़ के कृषि विभाग ने हाल ही में हापुड़ की रामपुर रोड पर स्थित मुर्गी दाना बनाने की एक फैक्ट्री में छापा मारा था जहां से 1400 कट्टे अनुदानित यूरिया बरामद हुआ। मामले में अपर जिला कृषि अधिकारी हापुड़ उर्वरक निरीक्षक पवन कुमार सैनी की तहरीर पर हापुड़ कोतवाली पुलिस ने 29 अप्रैल को छोटे पुत्र खलील निवासी नहाल गाजियाबाद, तंजीम पुत्र भूरे निवासी पुरानी चुंगी हापुड़ और स्टैंडर्ड फ्रूट प्रोटीन प्रोडक्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। किसानों को सब्सिडी पर मिलने वाले अनुदानित यूरिया के 1400 कट्टे फैक्ट्री से बरामद हुए थे। सूत्रों का कहना है कि अनुदानित यूरिया के साथ-साथ यहां से पशु अवशेष व चर्बी की गाद भी बरामद हुई थी।
मेरठ के दलाल की मदद से पहुंचा यूरिया:
सबसे बड़ी बात तो यह है कि पकड़े गए यूरिया को वैसे तो विभाग ने फैक्ट्री परिसर में ही सील कर दिया लेकिन यह यूरिया पाने के लिए किसान के आधार कार्ड और ई-पॉश मशीन से अंगूठे का निशान लेकर ही उन्हें यूरिया के कट्टे दिए जाते हैं। अब अनुदानित यूरिया के कट्टे किस तरह फैक्ट्री में पहुंचे यह सवाल खड़ा हुआ है? जानकारी के अनुसार मेरठ के लोहिया नगर के दलाल की मदद से यूरिया के कट्टे फैक्ट्री मालिक तक पहुंचे थे।
इन कंपनियों के मिले कट्टे:
रामपुर में विभाग ने जब छापामार कार्रवाई की तो यारा फर्टिलाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड, इंडोरमा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कानपुर फर्टिलाइजर एंड केमिकल लिमिटेड जेपी ग्रुप के कट्टे यहां से बरामद हुए हैं। वैसे तो अनुदानित यूरिया पाने के लिए किसान को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन फैक्ट्री में अनुदानित यूरिया कैसे पहुंचा? ऐसे में विभाग के अधिकारियों पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
देश भर में हो रही थी सप्लाई:
रामपुर रोड पर स्थित बिजली घर के पास मुर्गी दाना बनाने वाली फैक्ट्री से अनुदानित यूरिया बरामद होने के साथ ही कई राज भी खुले हैं। यहां से मुर्गी दाना बनाकर पूरे देश भर में सप्लाई हो रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुर्गी दाना बनाने के लिए फैक्ट्री संचालक दूसरे के जिलों में संचालित मीट प्लांट से पशु अवशेष कचरा, चर्बी की गाद मंगाते हैं। पशु अवशेष व गार्ड 5 से 7 रुपए किलोग्राम के हिसाब से खरीद कर मुर्गी दाना प्लांट पर लाया जाता है जहां इन्हें सुखाया जाता है। पशु अवशेषों के सूखने पर उसमें मार्बल की राख और यूरिया मिलाया जाता है। मिश्रण की मशीन से पिसाई की जाती है और पिसाई के पश्चात तैयार मिश्रण को छाना जाता है जिसके बाद मुर्गी का दाना तैयार होता है। 50किलोग्राम के मुर्गी दाने के एक कट्टे की कीमत दो हजार रुपए के आसपास है लेकिन यह मुर्गी दाना मुर्गियों के साथ-साथ चिकन खाने वालों के लिए भी काफी हानिकारक है क्योंकि मुर्गी का शरीर इस मुर्गी दाने से तेजी से बढ़ता है और वह जल्द ही बिक्री के लायक हो जाते हैं। मुर्गा-चिकन खाने वालों के हृदय व किडनी पर दुष्प्रभाव पड़ता है और ऐसे मुर्गा खाने वालों की मौत तक हो सकती है।
भ्रष्टाचार पर खड़ी यह फैक्ट्री:
आपको बता दें कि कई विभागों की एनओसी के बिना ही यह फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित थी जहां पशुओं के अवशेष मिलने पर कई सवाल खड़े होते हैं। थोड़े से लालच के चलते लोगों की जिंदगी को दाव पर लगाने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आपको बता दें कि और भी मुर्गी दाना बनाने की फैक्ट्री है जो कि विभाग की रडार पर हैं।
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