हापुड़, सीमन(ehapurnews.com ):हिंदी प्रोत्साहन समिति हापुड़ के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन जयंती पर यहां आयोजित एकऑन लाइन कवि सम्मेलन में कवि ,गीत एवम् गजलकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
अध्यक्षता डा अनिल बाजपेई ने की तथा मंच संचालन गरिमा आर्य ने किया।
मुख्य अतिथि डा. विमलेश शर्मा ने कहा कि कवि रचनाएं एवम् व्यंग्य के माध्यम से पथ प्रदर्शक का कार्य करते हैं।
विशिष्ट अतिथि राकेश माहेश्वरी एवम् पुष्पा आर्य ने कहा कि महाराजा अग्रसेन ने एक रुपया एवम् एक ईंट का संदेश देकर बहुत महान कार्य किया था।
इस अवसर पर एटा की कवयित्री समीक्षा जादौन ने पढ़ा मैं वेदों का अमर ज्ञान, मैं वचनों की परिपाटी हूँ,मैं युद्धों का अर्जित फल, वीरों की हल्दीघाटी हूं ,मैं सत्य सनातन सी पावन, मर्यादित हूँ सदियों से
मैं तन मन से हिन्दू हूँ , मैं भारत माँ की माटी हूँ।
डा अनिल बाजपेई ने पढ़ा ‘ अम्बर में टिमटिम करें,तारे ‘अनिल’ अनेक,!
कभी झगड़ते ये नहीं,रहते मिलकर एक!!
संचालन करते हुए गरिमा आर्य ने पढ़ा, ‘पराक्रम, वीरता, शौर्य और साहस अपरिमित,बुद्धि और कौशल से हैं जिसके भलीभांति परिचित,
एक ईंट एक रुपए से जिसने कर दी सबके सिर पर छत ,ऐसे महाराजा अग्रसेन को करते नमन वंदन !डा मंजीत सिंह अवतार ने पढ़ा ‘बेटियां भारत की आन बान शान थी,
बेटियां बाबुल के घर की पहचान थी,,आज वही बेटी हुई बड़ी लाचार है,छेड़छाड़ संग में बढा बलात्कार है।।
डा आराधना बाजपेई ने पढ़ा ‘ मिले हर कदम पर बहारों कामौसम,मुस्कराते खिले चांद तारों का मौसम,है यही आरजू तेरी ‘आराधना ‘हो मधुर जिंदगी के नज़ारों का मौसम!!
ममता लडीवाल ने पढ़ा, ‘
‘प्रेम मरता नही होता अवतार है,प्रेम बिन सूना सोना ये संसार है,मीरा ने भी कहा प्रेम धन है बड़ा,प्रेम सृष्टि के चलने का आधार है।दिल्ली से सी ए वैशाली मित्तल ने पढ़ा ‘ तप कर दमकी है भारतीय सेना,ले निज खून पसीनो से,ये कांच के टुकड़े क्या टक्कर लेंगे, भारत के नगीनों से ‘! एटा के कवि
बलराम सरस ने पढ़ा, ‘कोरोना की घरबन्दी में कैसे कैसे पल बीते।
तस्वीरों से बातें करते दीवारों के संग जीते
प्रिये तुम्हारी याद बहुत आयी इस तन्हाई में,
बिना तुम्हारे घर के कोने लगते हैं रीते रीते।।
खुर्जा की कवियित्री सुमन बहार ने पढ़ा ‘ लगाता है जो पौधे को वो छाया को तरसता है,कहीं घनी घटाएं हों,कहीं बादल बरसता है।’
डा पुष्पा गर्ग ने पढ़ा,पीर बनके वह पीड़ा बढ़ाने लगे,
आंसुओं में अक्स उनके आने लगे। कास गंज के कवि लंकेश ने पढ़ा ‘चल तबाही का समन्दर पार कर,मौत का दरिया कलन्दर पार कर ।
लूट कर जा तो रहा है बेरहम,रेत का तूफ़ां सिकन्दर पार कर।।’
नोएडा के कवि सूर्य प्रकाश सोनी ने पढ़ा
‘जनता मरती भूख से, नेता लेते स्वाद।
वादे करके भूलते , बातों के उस्ताद।’
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