हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): ऊर्जा निगम का विवादों से पुराना नाता है। ऊर्जा विभाग के सरकारी नोटिस में से कुछ फर्जी पाए गए हैं जिसकी जांच शुरू हो गई है। गुरुवार को मेरठ से आई टीम ने इस संबंध में साक्ष्य जुटाए हैं। बताया जा रहा है कि करोड़ों के फर्जीवाड़ा का जल्द ही खुलासा होगा। 30 से अधिक नोटिस ऐसे मिले हैं जिनमें निर्धारित जुर्माना राशि और पोर्टल पर जमा राशि के बीच छह से आठ गुना तक का अंतर भी मिला है।

लाइन लॉस की शिकायत पर बिजली चोरों के खिलाफ चल रहे अभियान के क्रम में विजिलेंस ने सैकड़ों मामले में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके सापेक्ष डिवीजन कार्यालय से प्रपत्र 4 के जरिए उपभोक्ताओं को जुर्माना नोटिस भेजा जाता है। लाखों रुपए का नोटिस बनाकर भेजा जाता है। उपभोक्ता को अपना पक्ष रखने के लिए कार्यालय बुलाया जाता है। यहीं से भ्रष्टाचार का खेल शुरू होता है।

उपभोक्ता को झांसे में लेकर पैसे ऐंठे जाते हैं और अवैध वसूली करते हैं। अधिकारी उपभोक्ता पर दबाव बनाकर नोटिस में अंकित राशि का आधा पैसा ले लेते हैं और शर्त रखते हैं कि रसीद में भले ही कितने रूपए हो इसकी जानकारी कहीं ना दी जाए। इस तरह के कई मामले सामने आए थे। विजिलेंस ने जांच की जिनमें से 100 से अधिक नोटिस चेक कर लिए गए हैं। मेरठ से आई टीम ने साक्ष्य जुटाए। सात महीने में सिर्फ एक कर्मचारी पर कार्रवाई हुई है। आगे की जांच की जारी है।
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