
जीएसटी विभाग के शोषण पर व्यापारी गुस्साए
हापुड, सीमन (ehapurnews.com):उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश की जिला इकाई के नेतृत्व में मंगलवार को जीएसटी विभाग द्वारा व्यापारियों के कथित शोषण व उत्पीड़न के विरोध में एक ज्ञापन विभाग के हापुड अफसर को दिया और जीएसटी में व्याप्त विसंगतियो को दूर करने की मांग की।व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि जी.एस.टी.आर.-1 फाईल करते समय बी2. बी व बी2सी के लिए एच.एस.एन. समरी अलग-अलग मांगी जा रही है जिसका कोई औचित्य नही है। सिर्फ व्यापारियों के उत्पीड़न के लिए एच.एस.एन. समरी अलग-अलग मांगी जा रही है जिस पर रोग लगाई जानी अत्यंत ही आवश्यक है।
सैन्ट्रल जी.एस.टी. कार्यालय द्वारा 2019-20, 2020-21, 2021-22, 2022-23 तक 5 वर्षों की सूचनाएं व कागजात 15 दिन का समय देकर मांगे जा रहे हैं तथा फिजिकल ऑडिट के लिए टीम बनाकर व्यापारी के कार्यस्थल पर भेजी जा रही है जबकि अधिकांश के निर्धारण पूर्व मे हो चुके हैं। बार-बार नोटिस व ऑडिट किये जाने से व्यापारी उत्पीड़न व भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है जिस पर रोक लगाई जानी अत्यंत आवश्यक है।
जी.एस.टी. रजिस्ट्रेशन सरेण्डर करने की दशा मे जी.एस.टी. आर-10 अपलोड किये जाने के बाद भी व्यापारी को कार्यालय मे बुलाने के लिए जी.एस.टी.आर.-10 फाईल करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं जिस पर रोक लगाई जानी अत्यंत ही आवश्यक है।
सचल दस्तों के द्वारा पूरा टैक्स जमा होने के बाद भी तकनीकी आधार पर (मानवीय भूलों) अनावश्यक कमियां निकालकर जुर्माना जमा कराया जा रहा है जिसकी आड़ मे भारी भ्रष्टाचार पनप रहा है। सचल दस्तों का काम कर अपवंचना को रोकना है जहां पूरा कर जमा है तकनीकी कमी अथवा मानवीय भूलों के आधार पर गाड़ी रोककर जुर्माना लगाये जाने पर रोक लगायी जो।
जी.एस.टी. अधिनियम मे 40 लाख रूपये तक का व्यापार करने वाले व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन से छूट प्राप्त है परन्तु विभागीय अधिकारी टारगेट पूरा करने के लिए कम टर्न ओवर वाले व्यापारियों का भी उत्पीड़न कर रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। 40 लाख से कम कारोबार करने वाले व्यापारियों को बाध्य करने पर रोक लगायी जाये आदि।
इस अवसर पर संगठन के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र पंसारी ,अमन गुप्ता,दीपांशु गर्ग, गोविंद अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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