
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा की बैठक उपरांत प्रेसवार्ता सबली महादेव मंदिर हापुड़ में हुई जिसमें श्रावण शिवरात्रि पर होने वाले कावड़ जलाभिषेक मुहूर्त एवं पूजन विधि की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कावड़ यात्रा को नशामुक्त रखने का आह्वान किया गया। प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने कहा कि श्रावण मास 11 जुलाई से प्रारम्भ होकर 9 अगस्त तक रहेगा जिसमें भगवान भोलेनाथ के विशेष पूजन हेतु 4 सोमवार (14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई एवं 4 अगस्त ) 2 प्रदोष तिथि (22 जुलाई एवं 6 अगस्त ) नागपंचमी 29 जुलाई, अमावस्या 24 जुलाई तथा श्रावण पूर्णिमा 09 अगस्त को रहेगा। सावन महीने में देवाधिदेव महादेव भोलेनाथ का प्रमुख पर्व श्रावण शिवरात्रि कावड़ जलाभिषेक 23 जुलाई को सूर्योदय के साथ सुबह 5 बजकर 39 मिनट से प्रारम्भ होगा जो देर रात्रि 2 बजकर 29 मिनट तक किया जा सकता है अर्थात शिव भक्त पूरे दिन जलाभिषेक करेंगे। शिवालय में जलाभिषेक करते समय बैठकर यदि संभव नहीं हो तों झुककर ही जल चढ़ाना चाहिए तथा मस्तक पर त्रिपुण्ड (तिलक) लगा होना चाहिए। गंगाजल को लेकर उत्तर की ओर मुख करके सबसे पहले भगवान गणेश जी उसके बाद कार्तिकेय जी फिर नंदीजी, पार्वती जी और अंत में शिवलिंग पर जल चढ़ाए। साथ ही मन ही मन ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करते रहे।
शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ को यज्ञोपवीत अवश्य चढ़ाए। कांवड़ यात्रा के समय में व्यसन (शराब, बीड़ी, सिगरेट, चरस आदि) करने से कावड़ यात्रा खंडित व व्यर्थ व निष्फल हो जाता है। महासभा प्रवक्ता पंडित आशीष पोखरियाल ने बताया कि महासभा द्वारा सभी प्रमुख मंदिरों में कावड़ जलाभिषेक के सम्बन्ध जानकारी हेतु फ्लैक्सी लगाई जाएगी तथा गंगा तट व रास्तों पर भी नशामुक्ति एवं स्वच्छता जागरूकता के लिए अभियान चलाया जाएगा। महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय ने कहा कि भगवान शिव सर्वाधिक सहनशील, दयालु व कृपालु है। उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए उनके जीवन से परोपकार की शिक्षा लेनी चाहिए।
कावड़ यात्रा में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गो को परेशानी ना हो इसका ध्यान प्रशासन के साथ विशेष रुप से युवा वर्ग के कावड़ियों से शालीनता व सदाचार का आग्रह है। यही सच्चा शिव जलाभिषेक का पुण्य होगा, ताँबे, कांसे या चाँदी के लोटे से जलाभिषेक करना उत्तम रहता है, मंदिर समितियां कावड़ जलाभिषेक के लिए महिलाओं, बीमार व बुजुर्गो के लिए अलग लाईन की व्यवस्था करें मंत्री डॉ0 करुण शर्मा ने कहा कि शिवालय में शिवलिंग के अतिरिक्त अन्य मूर्ति नहीं है तो सबसे पहले पूर्व फिर दक्षिण, पश्चिम, उत्तर क्रमानुसार और अंत में शिवलिंग पर जल चढ़ाए। शिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा का भी विशेष महत्त्व है जो समस्त पापों का नाश करके उत्तम फल प्रदान करता है। श्रद्धालु पितृदोष निवारण, कर्जमुक्ति, रोगमुक्ति,चन्द्र, राहु, केतु, शनि ग्रह शान्ति हेतु एवं सुख शान्ति, समृद्धि के लिए गंगास्नान कर जलाभिषेक अवश्य करें। पंडित देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि भगवान शिव के पूजन में गंगाजल, विल्वपत्र, आँक (मदार) के पुष्प, फल, पत्ते, शमी पुष्प, पत्ते, धतूरा, सफ़ेद व पीले पुष्प, सफ़ेद मिष्ठान, दूध, गन्ने का रस, अक्षत (बिना टूटे चावल), गेहूँ, तिल, दही, शहद, देशी घी, तुलसी की मंजरी, दूर्वा आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए, भगवान भोलेनाथ को कभी भी हल्दी, रोली, तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, नारियल का जल ना चढ़ाए तथा शंख से अभिषेक भी नहीं करना चाहिए। सबली मंदिर के पुजारी पंडित रविशंकर शुक्ला ने कावड़ जलाभिषेक के संबंध में बताया कि धर्मग्रंथो व श्रुतियों के अनुसार समुद्रमंथन के बाद निकले हलाहल विष को सृष्टि रक्षा हेतु भगवान भोलेनाथ ने पी लिया था। विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया। एक अन्य कथा अनुसार हत्या के पाप से निवृति के लिए भगवान परशुराम जी द्वारा बागपत स्थित पूरा महादेव का जलाभिषेक किया गया। भगवान श्री राम ने भी कावड़ जलाभिषेक किया था तथा रावण द्वारा भी जलाभिषेक का वर्णन मिलता है। बारह ज्योतिर्लिंग में इसकी विशेष महत्ता है स्कन्द पुराण, शिव पुराण, लिंगपुराण, नारदसंहिता आदि धर्मग्रंथों का उदाहरण देते हुए बताया गया। पुत्र प्राप्ति के लिए दूध से, प्रेम के लिए दही से, मैत्री व शांति के लिए घी से दांपत्य जीवन सुखमय के लिए शक्कर मिश्रित दूध का, धनके लिए शहद से, व्यापार वृद्धि व धन प्राप्ति के लिए गन्ने का रस से, रोग नाश के लिए गिलोय से विद्या प्राप्त करने के लिए गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें। इस दिन किसी भी शिवलिंग पर जल चढ़ाने से शुभ फल अवश्य प्राप्त होता है। इस अवसर पर आसरा शिव मंदिर के पुजारी सोनेलाल मिश्रा, उपाध्यक्ष गौरव कौशिक, मंत्री देवी प्रसाद तिवारी, छपकौली मंदिर के पुजारी महेश पूरी, हनुमान मंदिर मिलक के पुजारी जगदम्बा शर्मा, राम मंदिर के पुजारी पंडित सर्वेश तिवारी, असौढ़ा मंदिर के पुजारी पंडित राहुल शर्मा, पंडित शिवम शास्त्री, पंडित श्याम मिश्रा,पंडित गोपाल, पंडित पवन आदि उपस्थित रहे।
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