
हापुड़, सीमन/अशोक तोमर (ehapurnews.com): विश्व आई वी एफ दिवस हर साल 25 जुलाई को मनाया जाता है ताकि 1978 में आई बी एफ तकनीक से लुईस ब्राउन नामक प्रथम बच्ची के प्रथम सफल जन्म के बाद से प्रजनन चिकित्सा में हुई प्रगति को मान्यता दी जा सके। इन विट्रो फर्टिलाईजेशन (आई वी एफ / टेस्ट ट्यूब बेबी) उन अनगिनत दम्पतियों के लिए आशा की किरण है जो संतान की तलाश में निराशा के अंधेरे में भटक रहे हैं।
बांझपन एक ऐसी स्थिति है जो 12 माह या उससे अधिक समय तक नियमित असुरक्षित यौन सम्बन्ध के बाद भी गर्भ धारण न कर पाने पर मानी जाती है। यह स्थिति पुरुष और महिला दोने के प्रजनन तंत्र में देखी जा सकती है और दुनिया भर में करोडो लोगों को प्रभावित करती है। एक अनुमान के अनुसार प्रजनन आयु वर्ग के हर छह दम्पतियों में से एक परिवार बांझपन का अनुभव करता है।
इन विट्रो फर्टिलाईजेशन (आई बी एफ / टेस्ट ट्यूब बेबी) में एक नियंत्रित प्रयोगशाला में शरीर के बाहर अंडे और शुक्राणु का संयोजन किया जाता है। फिर, भ्रूण को प्रयोगशाला में ब्लास्टोसिस्ट स्तर तक विकसित किया जाता है। तत्पश्चात, इसे गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ आरोपण और गर्भधारण की सम्भावनाये बढ़ जाती हैं।
चिकित्सा क्षेत्र में आई वी एक जैसी उन्नत तकनीक का स्थानीय स्तर पर हापुड़ में देव नन्दिनी टैस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के माध्यम से उपलब्ध होना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है. जहाँ पिछले 10 वर्षों में सफलता की अनेको कहानियां लिखी जा चुकी है। क्षेत्र की जानी-मानी प्रजनन विशेषज्ञ डा० विमलेश शर्मा के संरक्षण में संचालित देव नन्दिनी टैस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के सौजन्य से क्षेत्रीय एवं दूरस्थ क्षेत्रो के हजारो निराश परिवारों में बच्ची की किलकारियां गूंज रही है।विश्व आई बी एफ दिवस पर देव नन्दिनी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में उड्नु चिकित्सा तकनीक के माध्यम से उत्पत्र कुछ बच्चों एवं उनके माता-पिता का स्वागत किया गया और इस खुशी के अवसर पर केक काट कर आई बी एफ दिवस उत्सव मनाया गया ।
इस अवसर पर देव नन्दिनी हॉस्पिटल के चेयरमैन डा० श्याम कुमार, डा० विमलेश शर्मा, वा० गोविन्द सिंह, अशोक कुमार सिंह, ममता, प्रियंका रानी, कु० शानू, कु० शाहरुना एवं देव नन्दिनी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर एवं देव नन्दिनी हॉस्पिटल परिवार के समस्त समर्पित सदस्य / स्टाफ उपस्थित रहे।
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