
दिगम्बर मुनि आचार्य नमोस्तु सागर जी ने जैन साधको को प्रारम्भ कराई चमत्कारिक निरोगी काया साधना
हापुड, सीमन/सुरेश जैन (Ehapurnews.com): जैन धर्म मे वर्षायोग चातुर्मास के चार माह तप साधना का कालखंड है। इन चार माह मे जैन मुनिराज एक ही नगर मे रहकर तप, साधना करते हैं तथा जैन भक्तो को भी तप, साधना कराते हैं।बृहस्पतिवार प्रातःकाल से आचार्य नमोस्तु सागर जी ने जैन साधको को चमत्कारिक विशेष साधना प्रारम्भ कराई जो प्रतिदिन प्रातःकाल 6 बजे से चार माह तक निरन्तर चलेगी। चातुर्मास मे स्थापित कलशो के सम्मुख बैठक मुनि जी द्वारा चार माह मे सवा करोड मंत्र जाप होगा। आज अनेक जैन साधको ने साधना के प्रथम दिन बैठकर श्रद्धांपूर्वक साधना की। मुनिराज ने जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर भगवान आदिनाथ से लेकर अन्तिम तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी तक 24 तीर्थकरो का पूजन, नवग्रह पूजन तथा जाप कराया।आचार्य नमोस्तु सागर जी ने कहा कि इस साधना को पूर्ण मनोयोग से श्रद्धांपूर्वक करने से साधक के जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान सम्भव है इसके अनेक प्रत्यक्ष उदाहरण हैं जिन्होंने यह साधना की और अपने जीवन की विकट समस्याओ का निराकरण पाया।
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