डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट ने एनटीईपी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया












डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट ने एनटीईपी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया

हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): निक्षय आईडी बनाने, टीपीटी और टीबी इनफॉर्मर इंसेंटिव को लेकर हुई चर्चा
डा. रेणु डफे ने एकीकृत निक्षय दिवस पर टीबी जांच बढ़ाने पर दिया जोर

हापुड़, 13 मार्च, 2024। टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) स्टाफ को दक्ष करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। इसी क्रम में बुधवार को दस्तोई रोड स्थित जिला क्षय रोग केंद्र पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से मंडलीय कंसलटेंट डा. रेणु डफे ने एनटीईपी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह के नेतृत्व में जिला कार्यक्रम समन्वयक दीपक शर्मा, जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी और जिला पीएमडीटी समन्वयक मनोज कुमार गौतम समेत सभी वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी, लेखा और डेटा एंट्री ऑपरेटर मौजूद रहे।
डा. रेणु डफे ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा – फेफड़ों की टीबी से पीड़ित व्यक्ति के सभी परिवारिजनों को टीबी प्रीवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जाना आवश्यक है। एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (शरीर के दूसरे अंगो की टीबी) संक्रामक नहीं होती, इसलिए ऐसे रोगी के परिवारजनों को टीपीटी देने की आवश्यकता नहीं होती। बता दें कि जनवरी, 2024 से पहले पल्मोनरी टीबी के रोगी के परिवार में मौजूद पांच वर्ष तक के बच्चों को ही टीपीटी दी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। रोगी के संपर्क में रहने वाले सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों को टीपीटी दी जा रही है ताकि संक्रमण को फैलने से पहले ही रोका जा सके। जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने बताया – फेफड़ों की टीबी से पीड़ित रोगी को सार्वजनिक स्थान पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
डा. डफे ने बताया – टीपीटी देने के लिए क्षय रोगी के संपर्क में रहने वाले सभी व्यक्तियों की भी निक्षय आईडी बनानी है। यदि किसी संपर्की को टीपीटी लेते हुए टीबी की पुष्टि हो जाती है तो संपर्की की आईडी बंद कर देनी है और फिर क्षय रोगी के रूप में उसकी नई आईडी बनाकर टीबी का उपचार शुरू करना है। उन्होंने बताया – टीबी इनफॉर्मर की भी निक्षय पोर्टल पर आईडी बनानी है। सरकारी नौकर को टीबी इनफॉर्मर का लाभ नहीं दिया जा सकता। आशा कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संगठन और आम आदमी टीबी इनफॉर्मर का लाभ प्राप्त कर सकता है। टीबी इनफॉर्मर को टीबी लक्षण युक्त व्यक्ति को जांच कराने के लिए प्रेरित करना होता है। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर दो माह का उपचार पूरा होने के बाद उसे प्रति रोगी पांच सौ रुपए का इंसेंटिव प्रदान किया जाता है।

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