वैदिक धर्म ही सत्य सनातन धर्म है: आचार्य योगेश
हापुड़,सीमन (ehapurnews.com):महर्षि दयानंद सरस्वती जी की २००वी जयंती एवम आर्य समाज हापुड़ के १३३वे वार्षिकोत्सव पर शनिवार को प्रातः कालीन सत्र पवित्र सर्व श्रेष्ठ कर्म यज्ञ से प्रारंभ किया गया।
भजन शिरोमणि कंचन कुमार ने संगीतीय वाद्य यंत्रों के साथ अपनी रसभरी वाणी से वातावरण को प्रभु भक्तिमय बना दिया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पुष्पा आर्य रही। संचालन शिक्षाविद भारती गुप्ता व सोनू शर्मा ने किया।आचार्य योगेश वैदिक ने अपने ज्ञानवर्धक प्रवचन में श्रोताओं को कर्म काण्ड से ज्ञान कांड की ओर ले जाते हुए बताए की पंच महायज्ञ से मनुष्य कर्म करते हुए ज्ञान की ओर बढ़े तभी मानव जीवन सफल होता है।अपने यज्ञ वेदी,घृत,सामग्री,समिधा किसुंदर सार्थक व्याख्या कर इन्हें हमारे परिवार से जोड़कर व्यवहारिक ज्ञान वर्धन किया।
साय कालीन सत्र में “सत्य सनातन धर्म सम्मेलन “मनाया गया जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधान प्रेम प्रकाश आर्य ने की तथा संचालन विजेंद्र कुमार गर्ग लोहे वालो ने किया।मुख्य अतिथि ठाकुर विक्रम सिंह आर्य,संस्थापक अध्यक्ष राष्ट्र निर्माण पार्टी ने अपने ओजस्वी भाषण में बताया कि गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई हिंदू जाति को महर्षि दयानंद जी ने वैदिक धर्म की ओर आकर्षित कर स्वतंत्रता में जीना सिखाया।धर्म के नाम पर चल रहे पाखंड,अंधविश्वास बचाकर सत्य सनातन वैदिक धर्म के प्रति आस्थावान बनाया था।
विशिष्ठ अतिथि पंडित माया प्रकाश त्यागी,सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा ,दिल्ली ने कहा की आज हम अपने धर्म से भटके हुए है ।देश में धर्म के नाम पर नए नए कथाकथित्त धर्म के ठेकेदार सीधी सादी जनता को अपने जाल में फंसाकर,गुमराह करके धन इकट्ठा करने में लगे है।हमे इनसे सावधान होकर अपने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र,योगेश्वर श्रीकृष्ण,महर्षि दयानंद द्वारा अपनाए,दिखाए सत्य सनातन वैदिक धर्म पर ही चल कर मोक्ष की प्राप्ति के लिए उद्योग करना उचित है।
गुजरात की धरा से पधारे विद्वान आचार्य योगेश वैदिक ने सनातन धर्म की परिभाषा करते हुए बताया की सनातन अर्थात जो सृष्टि की उत्पति से भी पहिला था ,अब भी है और भविष्य में भी रहेगा ,ईश्वर जीव और प्रकृति सनातन हैं।ईश्वर ने सृष्टि की रचना करते हुए सर्व प्रथम चार सर्वश्रेष्ठ आत्मा (ऋषियों) के माध्यम से मनुष्य जाति के लिए चार वेदों का ज्ञान दिया।यही सत्य सनातन धर्म है।उसके बाद जो भी मत मतांतर,पंथ,मजहब, सम्प्रदाय आदि आज चल रहे हैं यह सब समय समय पर मनुष्यो द्वारा काल परिस्थिति के अनुसार चलाए गए हैं।हमे अपने मानव जीवन को सफल बनाने के लिए परम सत्ता ईश्वर द्वारा सृष्टि के आदि काल में दिए गए वेदों के ज्ञान पर ही चलना चाहिए।यही सत्य सनातन धर्म है।
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