इस बार सावन में शिवपूजा के लिए बन रहे 10 दिन दुर्लभ शुभ संयोग: ज्योतिषी के0 सी0 पाण्डेय
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्रावण मास इस बार पंचांग के अनुसार बन रहे श्रेष्ठ संयोग मुहूर्त से अत्यंत शुभ तथा सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाला होगा सावन महीना 22 जुलाई को भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार श्रवण नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ आरम्भ होकर 19 अगस्त को पुनः सोमवार, श्रवण नक्षत्र सर्वार्थ सिद्धि योग प्राप्त पूर्णिमा (रक्षाबंधन) को समापन होगा ये दुर्लभ शुभ संयोग है।
भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि वेदों में बताएं शिव महिमा तथा शिव महापुराण, लिंगपुराण, ब्रह्मपुराण, विष्णुपुराण, भविष्य पुराण आदि धर्मग्रंथो में वर्णित कथाओं के आधार पर सावन महीने में इस बार भगवान शिवपूजा के लिए 10 विशेष श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त दिन होंगे, 5 सोमवार व्रत पूजन (22 जुलाई, 29 जुलाई, 5 अगस्त, 12 अगस्त, 19 अगस्त ) 2 प्रदोष व्रत पूजन (1 अगस्त और 17 अगस्त), 4 अगस्त को रविपुष्य योग व सर्वार्थसिद्धि योग के साथ अमावस्या, 9 अगस्त को नागपंचमी तथा सावन महीने का प्रमुख कावड़ जलाभिषेक पर्व श्रावण शिव चतुर्दशी (शिवरात्रि) का जलाभिषेक 2 अगस्त शुक्रवार को दोपहर 3 बजकर 27 मिनट से प्रारम्भ होगा, कावड़ यात्रा 22 जुलाई से आरम्भ होगा वैसे तो सावन महीने का प्रत्येक दिन भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम है तथापि राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से ग्रसित, कर्ज मुक्ति, कई कष्टों से छुटकारा शान्ति व निवारण के लिए नागपंचमी, पितृ व चंद्र ग्रह दोष से पीड़ित, शीघ्र विवाह, गृह शान्ति के लिए सोमवार को, पितृदोष, कर्ज, रोग निवारण के लिए सावन रविपुष्य योग अमावस्या, संतान प्राप्ति, अभिष्ट फल प्राप्ति के लिए प्रदोष तथा सर्वमनोकामना सिद्धि के लिए सावन शिवरात्रि को विशेष पूजन, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक अवश्य करें, शिवरात्रि में 4 पहर की पूजा का भी विशेष महत्त्व है जो समस्त पापों का नाश करके उत्तम फल प्रदान करता है भगवान शिव के पूजन में गंगाजल, विल्वपत्र, आँक (मदार) के पुष्प, फल, पत्ते, शमी पुष्प, पत्ते, धतूरा, सफ़ेद व पीले पुष्प, सफ़ेद मिष्ठान, दूध, गन्ने का रस, अक्षत (बिना टूटे चावल), गेहूँ, तिल, दही, शहद, देशी घी, तुलसी की मंजरी, दूर्वा आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए, भगवान भोलेनाथ को कभी भी हल्दी, रोली, तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, नारियल का जल ना चढ़ाए तथा शंख से अभिषेक भी नहीं करना चाहिए. गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के बालकाण्ड में भगवान शिव की शक्ति का वर्णन करते हुए लिखा है
जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी॥
अर्थात भगवान शिव तप, पूजन से प्रसन्न होकर भविष्य में होने वाली घटनाओं को मनोनुकूल शुभ कर मनोवांक्षित फल प्रदान करते है सम्पूर्ण सृष्टि में मात्र देवाधिदेव भगवान भोलेनाथ को ही ब्रह्मा के लेखनी को मिटाने व बदलने का अधिकार है सावन महीने में प्रत्येक दिन जलाभिषेक करें इससे समस्त मनोकामना पूर्ण होगी.
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