
जैन तीर्थकरो ने सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, त्याग, जीवदया का सन्देश दिया:-जैन मुनि शुभ चन्द्र सागर
हापुड, सीमन/सुरेश जैन (Ehapurnews.com): जैन मुनि श्री 108 शुभ चन्द्र सागर जी महाराज ने श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कसेरठ बाजार पर जैन भक्तो को प्रवचन देते हुए कहा कि जैन धर्म मे 24 तीर्थकर हुए हैं।भगवान आदिनाथ जिन्हे ऋषभदेव भगवान भी कहा जाता है जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर हुए हैं।उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या मे हुआ था। जैन ग्रंथो के अनुसार भगवान आदिनाथ की आयु 84 लाख पूर्व थी उनके शरीर की ऊंचाई 500 धनुष लगभग 1500 मीटर थी।
उन्होंने 400 दिन निराहार रहकर घोर तपस्या की थी। उनके उपरांत जैन धर्म मे 23 तीर्थकर और हुए हैं।अन्तिम व 24 वे तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी हुए हैं।
जैन तीर्थकरो ने अहिंसा सत्य, अपरिग्रह, जीवदया का सन्देश दिया। जैन धर्म के अनुयायी तीर्थकरो को भगवान के समान मानकर उनकी शिक्षाओ को जीवन मे अपनाते हैं।
दिगम्बर जैन मुनि तप,त्याग, साधना की प्रतिमूर्ति हैं जो नग्न अवस्था मे रहते हैं,24 घन्टे मे केवल एक बार जल अन्न ग्रहण करते हैं,सम्पूर्ण देश मे पैदल ही यात्रा करते हैं।आज विश्व मे बढ़ती अहिंसा, आतंकवाद, व्यभिचार, अशांति को दूर करने मे जैन धर्म की शिक्षाओ को जीवन मे अपनाने की आवश्यकता है।
जैन समाज के अध्यक्ष सुधीर जैन टपिया, महामंत्री अशोक जैन, संरक्षक सदस्य सुधीर जैन, कोषाध्यक्ष सुखमाल जैन, सुरेश चन्द जैन, सुशील जैन, तुषार जैन, संदीप जैन, प्रदीप जैन, विकास जैन, गौरव जैन, अभिषेक जैन, सजींव जैन, राजीव जैन, दीपा जैन, मंजू जैन, मगन जैन, सीता जैन, सुषमा जैन, नेहा जैन, मीनू जैन, विनोद बाला जैन, प्रभा जैन, बबीता जैन, ऋचा जैन,दीपाली जैन सहित अनेक जैन भक्त उपस्थित थे।
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