
हापुड़, सीमन /संजय कश्यप(ehapurnews.com): गढ़मुक्तेश्वर रेंज के अंतर्गत, सारस संरक्षण समिति, उत्तर प्रदेश/क्षेत्रीय वनाधिकारी गढ़मुक्तेश्वर के निर्देश के क्रम में डा० रोस प्रतिमा मिंज, (जे०आर०एफ०) हापुड़ (जिला पर्यावरण समिति, सदस्य उत्तर प्रदेश) द्वारा गढ़मुक्तेश्वर रेंज के अधिकारी /कर्मचारियों को तकनीकी सत्र के माध्यम से जिला हापुड़ में पाए जाने वाले वन्यजीवों की अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करने हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय वनाधिकारी गढ़मुक्तेश्वर द्वारा कार्यशाला सत्र के दौरान रेंज के स्टाफ को बताया कि बृजघाट गंगा रिवर डॉल्फिन की उपस्थिति, गंगा नदी में पाए जाने वाले और आईयूसीएन कैटिगरी के अंतर्गत आने वाले वन्यजीवों की उपलब्धता एवं बहुतायत से पाए जाने के कारण अंतराष्ट्रीय स्तर पर इसे रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है। कार्यशाला में वन विभाग के समस्त स्टाफ को गंगा रिवर डॉल्फिन विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। तकनीकी सत्र के दौरान डॉल्फिन के आवास उनके व्यवहार उनके पारिवारिक जीवन पर चर्चा की गई। मानवों की भांति डॉल्फिन भी समूह (पॉड) में अपना जीवन निर्वाह करती हैं। डॉल्फिन दो से तीन साल के उपरांत एक बच्चे को जन्म देती है जिसे बछड़ा/बछड़ी कहते हैं। बच्चे की मां डॉल्फिन स्तनपान करवाती है और एक वर्ष तक उसे मनुष्य की भांति देखतीं संभालती भी है। उसके उपरांत डॉ० रोस प्रतिमा मिंज, द्वारा वन्यजीवों के प्रशिक्षण के उपरांत गढ़मुक्तेश्वर रेंज के अधिकारी/कर्मचारियों का प्रश्नोत्तरी द्वारा स्टाफ के ज्ञान का मूल्यांकन भी किया गया।
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