हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : हापुर की इंद्रलोक कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन महाराज दाऊदयाल बृजवासी ने बड़े ही सुन्दर शब्दों में सुदामा चरित्र सुनाया। उन्होंने बताया श्रीकृष्ण और सुदामा दोनों ने एक ही गुरु के आश्रम से शिक्षा प्राप्त की और बताया कि दोनों में मित्रता कैसे हुई। उन्होंने बताया श्रीकृष्ण गुरु के आश्रम जा रहे थे और रास्ते में उन्हें एक कांटा लगा। उसी समय सुदामा जी वहॉं आ गए और कांटे को निकालते हुए दोनों की मित्रता हो गयी। दोनों ने साथ में गुरु के आश्रम से शिक्षा प्राप्त की और लौट आए। सुदामा का विवाह के बाद ऐसी दशा हो गयी कि उनके यहां खाने के लिए अन्न का एक दाना भी नहीं था। सुदामा जी रोज अपने मित्र की कथा सुनाते थे लेकिन उन्होंने कभी अपनी पत्नी को यह नहीं बताया कि श्रीकृष्ण उनके मित्र हैं |
महाराज ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि एक दिन संत मंडली आयी और आकर के उन्होंने बताया कि धन्य है सुदामा जिनका मित्र श्री कृष्ण है। तब उनकी पत्नी को एहसास हुआ कि जिस मित्र की वो रोज कथा सुनाते थे वह सुदामा का ही मित्र हैं। उसके बाद जब सुदामा की पत्नी ने पूछा कि श्रीकृष्ण उनके मित्र है या नहीं। तब सुदामा ने कहा कि हां वह मित्र है। अपनी पत्नी के कहने पर सुदामा श्री कृष्ण से मिलने चले गए जिसका मंचन कथा में किया गया। इस दौरान सुदामा एक रुमाल में अपने साथ एक मुट्ठी चावल बांधकर ले गए। अपनी पत्नि के बार- बार आग्रह करने पर ना चाहते हुए भी सुदामा श्री कृष्ण से मिलने पहुंचे। इस अवसर पर श्रीकृष्ण और सुदामा मिलन की भव्य झांकी का आयोजन किया गया। इस मौके पर व्यवस्थापक पंडित देशराज, पंडित जतिन कौशिक, अंकित गोयल, तरुण कंसल, सुनील गोयल, भीमा अग्रवाल, यश बंसल, गुड्डू पंडित, अमन, सविता गोयल, शशि गोयल, पूजा, सुमन, अनुराधा, प्रीति, सोनिया अनेक भक्तगण सम्मिलित रहे।
































