
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भाई बहन के प्रेम, रक्षा संकल्प के साथ श्रावणी उपाकर्म का पावन पर्व रक्षाबंधन सर्वार्थसिद्धि योग व सौभाग्य योग में भद्रा रहित 09 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा 08 अगस्त को दोपहर 2.12 बजे से 09 अगस्त शनिवार को दोपहर 1.24 तक है तथा श्रवण नक्षत्र 09 अगस्त को दोपहर 2.23 तक रहेगा भद्रा 08 अगस्त को दोपहर, 2.12 से देररात्रि 1.52 तक है इसलिए व्रत की पूर्णिमा 08 अगस्त को तथा स्नान दान की पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन पर्व 09 अगस्त को रहेगा धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान का हयग्रीव अवतार श्रावण पूर्णिमा श्रवण नक्षत्र के प्रथम समय में हुआ था इसलिए हयग्रीव जयंती भी 08 अगस्त को ही मनाया जायेगा जबकि शास्त्रमत अनुसार रक्षाबंधन सूर्योदयकालीन पूर्णिमा के साथ श्रवण नक्षत्र में भद्रारहित अपरान्हकालीन पर्व है चुंकि 09 अगस्त को सूर्योदय 5.49 बजे से सुबह 7.25 तक अशुभ गुलिक काल एवं काल की चौघड़िया तथा सुबह 9.06 बजे से सुबह 10.45 तक राहुकाल है अतः सुबह 7.25 से दोपहर 2.23 तक लगातार अत्यंत शुभ मुहूर्त श्रवण नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग, शुभ की चौघड़िया, स्थिर लग्न, सौभाग्य योग,अभिजीत मुहूर्त, बल एवं विजय मुहूर्त में राहुकाल को छोड़कर बहने भाई की कलाई में राखी बांधे इससे भाई व बहन दोनों को आयु, यश, कीर्ति, प्रेम के साथ समृद्धि प्राप्त होगा पंडित के० सी० पाण्डेय ने बताया कि रक्षाबंधन श्रावणी पर्व है अर्थात रक्षाबंधन के दिन ब्राह्मण गुरु आचार्य के द्वारा मंत्र अभिमंत्रित रक्षासूत्र बधवाने का विशेष महत्व है विशिष्ट मंत्रों से अभिमंत्रित रक्षासूत्र एवं दसविध दिव्य स्नान तथा जनेऊ बदलने का विधान है धर्मग्रंथो में कहा गया है कि कर्तव्यो रक्षिताचारो द्विजान् सम्पूज्य शक्तितः। अर्थात् रक्षाबंधन के दिन ब्राह्मण सहित चारों वर्ण व अन्य मानवगण भावपूर्ण होकर ब्राह्मण आचार्य का पूजन कर सामर्थ्यनुसार दान कर ब्राह्मण आचार्य से रक्षासूत्र बांधने का निवेदन करें। ब्राह्मण निम्लिखित मंत्र येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबल:। तेनत्वां प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल। द्वारा शुभ मुहूर्त में अभिमंत्रित रक्षासूत्र बांधकर उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की कामना करें तो निश्चित ही आपका कल्याण होगा उन्होंने कहा कि निर्णयसिंधु में ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार इदं प्रतिपद्युतायां न कार्यम्। नन्दाया दर्शने रक्षा बलिदानं दशासु च। अर्थात रक्षाबंधन को प्रतिपदा से युक्त न करे क्योंकि नन्दा (प्रतिपदा) के दर्शन में रक्षादशा में बलिदान होता है अर्थात् शुभ नहीं होता इसलिए विशेष परिस्थिति में ही दोपहर 2.23 के बाद से रात्रिकाल तक उदया कालीन तिथि मानकर शुभ धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षासूत्र बांधना चाहिए।
Dhanwantari Distributors का Immurich Capsule अब घर पर बैठे मंगवाएं: 9837700010





























