
हापुड़,सीमन (ehapurnews.com):गणपति महोत्सव के उल्लासपूर्ण धूमधाम से समापन के बाद पूर्वजों -पितरों के प्रति श्रद्धा समर्पण का महापर्व 16 दिवसीय महालया श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) का प्रारम्भ 7 सितंबर रविवार से हो रहा है। सप्तमी तिथि के क्षय होने के कारण इस बाऱ 15 दिन रहेगा जिसका समापन भी रविवार 21 सितंबर अमावस्या को होगा जिसमें प्रतिदिन तर्पण जल देकर तथा स्वर्गवास तिथि पर पार्वण श्राद्ध कर पितरों के प्रति श्रद्धा कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तृप्त कर आशीर्वाद प्राप्त किया जाएगा। इस बाऱ श्राद्ध पक्ष का प्रारम्भ 7 सितंबर पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण तथा समापन के दिन 21 सितंबर को सूर्यग्रहण के साथ हो रहा है जो पितरों के निमित्त दान आदि के लिए अधिक शुभदायक है। हालांकि सूर्यग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। अतः इसका कोई सूतक भारत में मान्य नहीं होगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के० सी० पाण्डेय काशी वाले ने ग्रहण में श्राद्ध करने के संशय को दूर करते हुए इसके फल और महत्व के बारे निर्णय सिंधु धर्मग्रंथ के वचन से श्लोक “चन्द्रसूर्यग्रहे यस्तु श्राद्धं विधिवदाचरेत्। तेनैव सकला पृथ्वी दत्ता विप्रस्य वै करे।।” यथा विष्णुः-राहुदर्शनदत्तं हि श्राद्धमाचन्द्रतारकम्। इदं चामान्नेन हेम्ना वा कार्यं नत्वन्नेन ” का उदाहरण देकर बताया कि धर्मग्रंथो में ग्रहण में श्राद्ध करना कहा है-जो मनुष्य चन्द्र या सूर्यग्रहण में श्राद्ध को करता है, उसने ब्राह्मणों के हाथ में मानो सम्पूर्ण भूमि दे दी है अर्थात् महान पुण्य फल प्राप्त करता है।वही विष्णु का वचन है कि- ग्रहण में दिया हुआ। श्राद्ध तब तक स्वर्ग में रहता है। जब तक सूर्य-चन्द्र रहेंगे परन्तु यह श्राद्ध आमान्न ( बिना पकाया हुआ अन्न ) या सुवर्ण से ही करे, पके अन्न से न करें उन्होंने एक अन्य श्लोक “आपद्यनग्नौ तीर्थे च चन्द्रसूर्यग्रहे तथा। आमश्राद्धं प्रकुर्वीत हेमश्राद्धमथापि वा” का उदाहरण देकर बताया कि आपत्तिकाल में, अग्नि के अभाव में, तीर्थ एवं चन्द्र-सूर्य के ग्रहण में आमान्न अर्थात बिना पका भोजन से या सुवर्ण से श्राद्ध करना सही बताया गया है है पंडित के० सी० पाण्डेय ने कहा कि 7 सितंबर को चंद्रग्रहण का प्रारम्भ रात्रि 9.57 से होगा। भारत में दृश्यमान होने के कारण इसका पूर्ण शुभाशुभ प्रभाव रहेगा तथा सुतक भी मान्य होगा। सुतक दोपहर 12.57 से लग जाएगा जिसके कारण मंदिर के कपाट बंद रहेंगे सभी को ग्रहण संबंधित सभी नियम का पालन भी करना होगा। ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति ) देररात्रि 1.27 पर होगा ग्रहण के समय किया जाने वाला स्नान, दान, मंत्रजप कई गुना अधिक शुभ फल प्रदान करेगा। इस बाऱ सप्तमी तिथि के क्षय होने के कारण पितृ पक्ष (महालय )15 दिनों का रहेगा। 7 सितंबर को पूर्णिमा व्रत के साथ भगवान श्री सत्यनारायण पूजन करने वाले सुतक से पूर्व ही दोपहर 12.57 तक पूजन कर ले पूर्णिमा का श्राद्ध होगा। बिना पके अन्न अर्थात् अनाज से होगा। यदि ग्रहण के कारण पूर्णिमा का श्राद्ध संभव ना हो तो अगले दिन या अमावस्या को भी श्राद्ध कर सकते है। ऐसा पुराण कथन है पार्वण श्राद्ध हमेशा मध्यान्ह (कुतुप बेला) या अपरान्ह में ही करना चाहिए। अतः इस बाऱ सप्तमी तिथि क्षय होने के कारण तात्कालिक तिथि ग्राहय शास्त्रमत के अनुसार चतुर्थी एवं पंचमी का श्राद्ध 11 सितंबर गुरुवार को होगा श्राद्ध इस प्रकार होगा।07 सितम्बर रविवार प्रथम श्राद्ध पूर्णिमा08 सितम्बर सोमवार प्रतिपदा श्राद्ध 09 सितम्बर मंगलवार द्वितीया श्राद्ध 10 सितंबर बुधवार तृतीया श्राद्ध 11 सितम्बर गुरुवार चतुर्थी श्राद्ध 12.45 तक उसके बाद पंचमी श्राद्ध12 सितम्बर शुक्रवार सुबह 9.58 के बाद षष्ठी श्राद्ध13 सितंबर शनिवार सप्तमी श्राद्ध14 सितंबर रविवार अष्टमी श्राद्ध15 सितंबर सोमवार नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी) 16 सितंबर मंगलवार दशमी श्राद्ध17 सितम्बर बुधवार एकादशी श्राद्ध18 सितम्बर वृहस्पतिवार द्वादशी श्राद्ध19 सितम्बर शुक्रवार त्रयोदशी श्राद्ध एवं मघा श्राद्ध20 सितंबर शनिवार चतुर्दशी श्राद्ध21 सितंबर अमावस्या श्राद्ध (सर्व पितृ अमावस्या) किया जाएगा। धर्मग्रंथो में श्राद्ध के विषय में विस्तार से बताया गया है निर्णयसिंधु में ब्रह्मपुराण के अनुसार बताया गया है की पक्षभर अर्थात आश्विन कृष्ण पक्ष से प्रतिदिन श्राद्ध करना चाहिए यदि संभव ना हो तो त्रिभागहीन अर्थात पंचमी से या दशमी से या अर्धभाग यानि अष्टमी से भी श्राद्ध कर सकते है इससे पितर तृप्त होते है निर्णयसिंधु व धर्मसिंधु धर्म ग्रंथ के अनुसार विवाह से पहले मृत्यु होने वाला का श्राद्ध पंचमी तिथि को , आश्विन कृष्ण पक्ष नवमी को किसी भी सौभाग्यवती (सुहागन) स्त्री की मृत्यु का श्राद्ध , द्वादशी को सन्यासी का श्राद्ध, नवजात शिशु का श्राद्ध त्रयोदशी को तथा अकाल मृत्यु वाले व्यक्ति का श्राद्ध चतुर्दशी को करना चाहिए यदि किसी की तिथि ज्ञात ना हो या तिथि पर ना कर सके तो सभी व्यक्तियों का श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या को करना चाहिए यही शास्त्र सम्मत है श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन 5 ग्रास गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी व देवता भोजन निकाल कर ही स्वयं भोजन करना चाहिए तर्पण प्रतिदिन करना चाहिए योग्य ब्राह्मण द्वारा श्राद्ध कराकर उन्हें यथाशक्ति दान अवश्य देना चाहिए, पितरों के निमित्त उनके प्रिय वस्तुओं का दान भी करना चाहिए श्राद्ध पक्ष में किए गए श्राद्ध तर्पण आदि से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देकर अपने यथोचित स्थान को चले जाते है.



























