
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): शक्ति उपासना देवी पूजन महापर्व शारदीय नवरात्रि का प्रारम्भ तृतीया तिथि वृद्धि के साथ 22 सितम्बर दिन सोमवार से हो रहा है जो इस बार 10 दिन का होगा दशहरा पूजन 2 अक्टूबर दोपहर में श्रवण नक्षत्र में किया जाएगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा विद्वानों ने राजेंद्रनगर स्थित प्रधान कार्यालय पर बैठक कर घट स्थापना मुहूर्त, व्रत, पूजन विधि, मंत्र, हवन तथा देवी पूजन दिनों का धर्मशास्त्रनुसार निर्धारण कर इस बार 10 दिनों तक माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों के पूजन का विधान बताया महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि यह नवरात्रि द्विपुष्कर योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, ब्रह्म योग, इन्द्र योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, धृति योग सहित अनेक शुभ योग के साथ शुभफलदायक सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला होगा माता का आगमन हाथी पर और प्रस्थान मनुष्य पर होने से राष्ट्र, समाज व व्यक्ति के लिए धन्य धान्य वृद्धि, शुभ, सौभाग्य दायक रहेगा निर्णय सिंधु एवं देवी भागवत मे वर्णित तिथि और नक्षत्र का भी सुन्दर संयोग भी इस बार सप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी के दिन बना है जिसमें व्रत पूजन करने वाले भक्तों को विशेष शुभ फल प्राप्त होगा।
घट स्थापना श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त :-
सुबह 6.11 से 7.41 अमृत की चौघड़िया तथा सुबह 10.38 से 12.35 स्थिर लग्न व अभिजीत मुहूर्त (इसके साथ ही सूर्यास्त से पूर्व अन्य समय में भी शुभ लग्न चौघड़िया के अनुसार कर सकते है) परन्तु राहुकाल सुबह 7.41 से 9.11के बीच घटस्थापना ना करें महामंत्री विदुषी अनिशा सोनी पाण्डेय ने कहा कि कलश स्थापना के लिए मिट्टी का घड़ा उत्तम रहता है माँ को प्रथम दिन पूजन से लेकर नौ दिनोंतक क्रमशः तेल, कंघी, शीशा, सिंदूर, महावर, मधु, काजल, वस्त्र, आभूषण आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए माँ को लाल गुड़हल का पुष्प व लाल चुनरी भी अर्पित करे तथा दूध से बनी मिठाई भी चढ़ाएं महासभा मंत्री आचार्य देवी प्रसाद तिवारी ने बताया कि घटस्थापना प्रथम दिन माँ शैलपुत्री पूजन के बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री देवी का पूजन 10 दिनों तक होगा तृतीया वृद्धि तिथि होने 24 और 25 सितंबर दो दिन माँ चंद्रघण्टा का पूजन होगा जिससे साहस, शक्ति, निर्भयता प्राप्त होगा तथा शत्रुओं से छुटकारा होगा घट स्थापना व प्रतिदिन पूजन के लिए कलश के साथ पंचपल्लव या आम के पत्ते (पल्लव) , जल वाला नारियल, कलावा, रोली, सुपारी, गंगाजल, सिक्का, दूर्वा, गेहूं, अक्षत(चावल), हल्दी, पान के पत्ते, कपूर, लौंग, जावित्री, इलायची, धुप, देशी घी, गाय का दूध, दही, शहद, जोतबत्ती, हवन सामग्री, श्रृंगार का सामान, लाल वस्त्र, फल, मिष्ठान आदि सामान की आवश्यकता होती है कलश स्थापना करने वाले को दुर्गासप्तसती का नित्य पाठ स्वयं या योग्य ब्राह्मण से करवाना चाहिए पुरे 9 दिन तक व्रत अवश्य करना चाहिए जो इस बार 10 दिन का होगा प्रतिदिन एक कन्या को खिलाते हुए वृद्धि करते हुए 9वे दिन नौ कन्याओं को खिलाना चाहिए अगर ये संभव ना हो तो अष्टमी अथवा नवमी को 9 कुमारी कन्यापूजन कर भोजन कराये धर्मग्रंथो के अनुसार कन्या की उम्र 2 वर्ष से कम या 10 वर्ष से अधिक नही होना चाहिए कन्याओं के नाम क्रमशः कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, काली, चंडीका, शाम्भवी, दुर्गा तथा सुभद्रा के पूजन फल प्राप्त जानना चाहिए कोषाध्यक्ष आचार्य मित्र प्रसाद काफ्ले ने कहा कि व्रत के नवें दिन हवन करें हवन मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” एवं “नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भदायै नियता: प्रणता: स्मताम्”।। से आहुति दे तथा दशमी 2 अक्टूबर वृहस्पतिवार को विसर्जन के बाद व्रत का पारण होगा जो लोग 9 दिन का व्रत नही कर सकते है वो धर्मग्रन्थ अनुसार श्रद्धा भाव से प्रथम दिन व अष्टमी के दिन अथवा सप्तमी, अष्टमी व नवमी तीन दिन का व्रत रख कर भी माँ की कृपा प्राप्त कर सकते है महाअष्टमी व्रत निशापूजन बली 30 सितंबर मंगलवार तथा महानवमी व्रत पूजन, बलि, हवन 01 अक्टूबर बुधवार को होगा संरक्षक डॉ0 वासुदेव शर्मा ने बताया कि राजा और क्षत्रिय को छोड़कर सभी को सात्विक बलि देने का ही विधान है कोहड़ा (कुष्मांड), नारियल, नींबू, जायफल की बलि देवी को प्रदान करना चाहिए दशहरा पर्व 2 अक्टूबर को होगा तथा दशहरा पूजन सुबह 9.13 के बाद श्रवण नक्षत्र में किया जाएगा
दशहरा पूजन श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त:-
सुबह 9.44 बजे से दोपहर 1.36 तक तथा रावण दहन सायंकाल 6 बजे के बाद किया जाएगा बैठक में मंत्री डॉ0 करुण शर्मा, समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय,प्रवक्ता पंडित आशीष पोखरियाल, मिडिया प्रभारी आचार्य सर्वेश तिवारी, पंडित श्याम मिश्रा, पंडित अजय त्रिपाठी आदि ने भी विचार रखे।
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