बीसवीं सदी की ब्रिटिश कविताएं विषय पर संगोष्ठी










हापुड़,सीमन (ehapurnews.com): एस0एस0वी0 कॉलिज, हापुड के अंग्रेजी विभाग में ‘‘बीसवीं सदी की ब्रिटिश कविताऐं’’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें एम0ए0 अंग्रेजी तृतीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने अपने पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के आरंभ में संगोष्ठी की आयोजिका डॉ0 रानी तिवारी, एसोसिएट प्रोफसर, अंग्रेजी विभाग ने संगोष्ठी के विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीसवीं सदी के पहले भाग का एक प्रमुख साहित्यिक आंदोलन है आधुनिकतावाद। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के साहित्य में कुछ प्रवृत्तियों का वर्णन करने के लिए ‘उत्तर आधुनिक साहित्य’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। बीसवीं सदी के प्रमुख कवि टी0एस0 इलियट भी आधुनिकतावादी थे। यह अमेरिका में जन्में एवं शिक्षित हुए एवं 1927 में यह ब्रिटिश नागरिक बन गए। इनकी काव्य रचना ‘द वेस्टलैण्ड’ के लिए इन्हे 1948 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मनित किया गया। बीसवीं सदी के साहित्य के सबसे प्रमुख व्यक्तियों में से एक कवि थे डब्ल्यू0 बी0येट्स। वे आयरिश और ब्रिटिश दोनों साहित्यिक प्रतिष्ठानों के एक स्तंभ थे। वह एक प्रेरक शक्ति थे जिनमें प्रभाव से आयरिश साहित्य का पुनरूद्धार हुआ। यह पहले आयरिश व्यक्ति थे जिन्हें 1923 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ0 आर0के0 शर्मा ने बताया कि बीसवीं सदी के पहले दशकों के एक प्रमुख कवि थॉमस हार्डी थे। हार्डी आधुनिकतावादी नहीं थे वरन वे विक्टोरियन युग और बीसवीं सदी के बीच एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। उन्होंने आगे बताया कि 1930 के दशक में डब्ल्यू0एच0 ऑडन एक मुख्य कवि के रूप में सामने आये। इनके कई काव्य खण्ड 1950 और 1960 के दशक में प्रकाशित हुए। स्टीफन स्पेंडर और फिलिप लार्किन ने भी इन्हीं दशकों में अपनी प्रमुख रचनाऐं लिखीं। बीसवीं सदी की शुरूआत में बिम्बवाद ने आधुनिकतावाद का पथ प्रदर्शन किया। यह अंग्रेजी भाषा के साहित्य में पहला संगठित आधुनिकतावादी साहित्य आंदोलन माना गया।
इस संगोष्ठी में कु0 जेनी सिंह ने टी0एस0 इलियट की कविता ‘द वेस्टलैण्ड’ के सारांश पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। कु0 नेहा ने डब्ल्यू0एच0ऑडन की कविता पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। ऑडन की कविताओं की पृष्ठभूमि में पौराणिक तकनीक पर चर्चा किया। कु0 मोनिका ने ऑडन की कविता ‘द शील्ड ऑफ एकिलीज’ पर अपना पत्र प्रस्तुत किया और बताया कि ग्रीक पौराणिक कथाएं उन प्राचीन यूनानियों, उनके देवताओं, नायकों, अनुष्ठान प्रथाओं के महत्व के विषय में संबंधित मिथकों और किवदंतियों का आधार है। कु0 पारूल ने येट्स की कविता ‘द सेकंड कमिंग’ के आलोचनात्मक अध्ययन पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। यह कविता प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के तुरन्त वाद 1919 में लिखी गयी। समाज के पतन की अपनी अलग कल्पना और विशद वर्णन के साथ यह कविता येट्स की सबसे उद्धृत कविताओं में से एक है। कु0 प्रीति ने येट्स के काव्य में प्रतीकों के महत्व पर अपने विचार रखे। काव्य में सौंदर्य उत्पन्न करने के लिए कवियों द्वारा बात को सीधे ढंग से न कहकर उन्हे प्रतीक शैली में प्रकट किया जाता है। येट्स ने नए प्रतीको की भी सृष्टि की जिससे उनकी कविताओं के सौन्दर्य में वृद्धि हुई। इस संगोष्ठी में विवेक, शिल्पी, श्वेता, अमिता, हिमांशी गर्ग आदि छात्र-छात्राओं ने भी अपने पत्र प्रस्तुत किए। विभाग की अन्य शिक्षिकाएं डॉ0 रूचि अग्रवाल, कु0 देवेन्द्री गौर एवं सुष्मिता कौशिक भी इस संगोष्ठी में उपस्थित रहीं।







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