“यज्ञ सर्वश्रेष्ठ कर्म हैं “वेद
हापुड़,सीमन (ehapurnews.com): ईश्वर ने मनुष्य जीवन कर्म करने और किए गए कर्मों का फल भोगने के लिए दिया है।मनुष्य योनि में ही कर्म करने का अधिकार है,अन्य योनि में नहीं।कौन से कर्म करने योग्य है ,कौन से नहीं ।वैदिक मनीषी डॉ नरेंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि वेदों के अनुसार यज्ञ कर्म सर्व श्रेष्ठ है,लेकिन मात्र हवन करना ही यज्ञ नही हैं। महऋषि दयानंद सरस्वती ने प्रतिदिन पांच प्रकार के यज्ञ करने को महा यज्ञ बताया है।ब्रह्म यज्ञ(संध्या),देव यज्ञ ( अग्निहोत्र), पित्र यज्ञ,अतिथि यज्ञ और बलिवैश्वयज्ञ।प्रत्येक मनुष्य को यह पांच यज्ञ प्रतिदिन अवश्य करने चाहिए,तभी मनुष्य जीवन सफल होगा। आपने बताया कि सेवा,परोपकार,सत्यता ,आदि के कार्य भी यज्ञ की श्रेणी में आते हैं। अतः हमें अपने जीवन को उन्नत बनाने के लिए यज्ञ कर्म,सेवा, स्वाध्याय,सत्संग करते रहना चाहिए।
आर्य जगत की प्रसिद्ध भजनोपदेशिका सुदेश आर्या ने प्रातः की पावन बेला में मधुर कंठ से प्रभु भक्ति के गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में प्रधान पवन आर्य,मंत्री संदीप आर्य,सुरेंद्र गुप्ता कबाड़ी,वेदमित्र अर्यबंधु,मदन लाल,सुंदर लाल आर्य,अमित शर्मा,अनिल कसेरे,संजय शर्मा,महिला प्रधान वीना आर्या,शशि सिंघल,रेखा गोयल ,निधि आर्या आदि उपस्थित रहे।
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