
वेद, संस्कार और संस्कृति का संदेश दे रहा ऋषि बोधोत्सव
हापुड़,सीमन(ehapurnews.com):आर्य समाज मंदिर, हापुड़ में आयोजित ऋषि बोधोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को प्रातःकालीन सत्र वैदिक यज्ञ के साथ श्रद्धा एवं उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। यज्ञ ब्रह्मा धर्माचार्य धर्मेन्द्र शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक अग्निहोत्र कराया गया। यज्ञमान के रूप में चमन सिंह शिशोदिया, सुनील शर्मा,विवेक गर्ग, आकाश आर्य, राकेश गुप्ता एवं अजय गोयल सपत्नीक उपस्थित रहे।
यज्ञोपरांत शामली से पधारे यंत्रवादक सुभाष आर्य ने “भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है” तथा “प्रभु को न भूल, नशे में न डोल” जैसे प्रेरणादायी भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया।
हिसार (हरियाणा) से पधारी बहन कल्याणी आर्या ने “ईश्वर को भज प्राणी, जो चाहे निज कल्याण”, “मानव जीवन मिलना, तू मान सुखद संयोग” तथा “धन्य है महर्षि, वेद वीणा बजाकर गया” जैसे भजनों के माध्यम से वैदिक चिंतन का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय प्रखर वक्ता आचार्य योगेश भारद्वाज ने आत्मचिंतन का आह्वान करते हुए कहा कि मनुष्य सुख में आसक्त रहता है, दुःख में नहीं। मृत्यु को बड़ा दुःख माना जाता है, किंतु शरीर प्रत्येक क्षण परिवर्तनशील है और निरंतर क्षीण हो रहा है। उन्होंने ‘मैं कौन हूँ’ जैसे मूल प्रश्न को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि प्रश्न करने की प्रवृत्ति ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाती है।उन्होने आर्य समाज के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वेद समस्त सत्य विद्याओं का मूल स्रोत हैं तथा उनका अध्ययन और अध्यापन परम धर्म है। संस्कृति संरक्षण के लिए संस्कृत भाषा के अध्ययन पर विशेष बल देते हुए उन्होंने समाज की उन्नति हेतु साझा भोजन, साझा सुरक्षा और साझा उद्देश्य की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक, आत्मिक एवं सामाजिक उन्नति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए तथा सभी की सफलता में अपनी सफलता का अनुभव करना चाहिए। साथ ही उन्होंने आत्ममंथन करते हुए कहा कि यदि हम महर्षि दयानंद के विचारों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय नहीं होंगे तो आर्य समाज घर-घर तक नहीं पहुँच पाएगा; अतः वैदिक विचारधारा के व्यापक प्रसार का संकल्प आवश्यक है।
एलर्जी, चर्म रोग, गुप्त रोग के लिए अब रविवार को भी डॉक्टर शिशिर गुप्ता से लें परामर्श: 8979824365


























