हापुड़, सीमन (ehapurnews.com ) : कथा वाचक श्री गोपाल मोहन भारद्वाज जी महाराज ने बुधवार को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि धार्मिक ग्रंथ एक ऐसी औषधि है जो मानव को इधर उधर भटकने से रोकती है। धार्मिक ग्रंथ बांटने का नहीं, प्रेम के साथ रहने, एक दूसरे की मदद करने का संदेश देते हैं।
कथा वाचक श्री गोपाल मोहन भारद्वाज जी महाराज श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन भक्तों के बीच बोल रहे थे। श्री राधा कृष्ण संकीर्तन मंडल हापुड़ ने किस कथा का आयोजन किया है, जो 16 सितंबर तक चलेगी।
कथावाचक ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि अहंकार मानव को ले डूबता है और मनुष्य अहंकार से दूर रहना चाहिए। इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए ही भगवान श्री कृष्ण ने गिरिराज पर्वत को अपनी अंगुली पर धारण किया और ब्रज वासियों की रक्षा की। अंत में इंद्र, भगवान श्री कृष्ण के शरणागत हुए। गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग की परंपरा द्वापर काल से चली आ रही है, जो भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र का अहंकार भंग करने के बाद शुरू की। इस पर पूरा कथा स्थल श्री गिरिराज जी महाराज के उद्घोष से गूंज उठा। कथा के मुख्य यजमान श्री शांति स्वरूप गोयल दंपत्ति थे।
श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है और आज कथा स्थल भी छोटा पड़ गया। आयोजकों को श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी।
संसार की ओर से देवेंद्र सक्सेना एडवोकेट, कमल किशोर अग्रवाल, शिवकांत गर्ग, बिजेंद्र भाटी, राकेश शर्मा शास्त्री, गिरीश शर्मा, अजय सैनी, चौधरी सुधीर सिंह, मनीष कुमार आदि ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।





























