श्री राम कथा के श्रवण हेतु उमड़े लोग
हापुड, सीमन (ehapurnews.com): श्री रामलीला समिति रजिस्टर्ड हापुड़ के तत्वावधान में हापुड में आयोजित श्री राम कथा का रसास्वादन करने हेतु लोग उमड़ पड़े।संत प्रवर ने जैसे ही कथा स्थल पर प्रवेश किया तो भक्तों ने खड़े होकर सनातन धर्म की जय के उद्घोष तथा पुष्प वर्षा करके स्वागत किया।समिति के प्रधान रविंद्र गुप्ता, महामंत्री विनोद कुमार वर्मा ,कोषाध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने श्री रामचरितमानस जी की विधिवत आरती की। मुख्य यजमान व्यवसायी राजीव गोयल एवं श्रीमती रश्मि गोयल रहे।
कथा वाचक पवन देव चतुर्वेदी जी महाराज ने बताया कि जब भगवान शंकर जी का विवाह हो गया तो माता पार्वती जी के सहित आप कैलाश में आए तब माता पार्वती जी ने भगवान श्री राम जी की कथा जानने की इच्छा व्यक्त की भगवान शंकर जी ने श्री राम जी की कथा को पार्वती जी को श्रवण कराया कि एक बार देव ऋषि नारद ने भगवान को श्राप दिया था पार्वती जी पूछने लगी भगवान विष्णु जी के परम भक्त नारद जी और उन्होने भगबान बिष्णु को श्राप क्यों दे दिया तो पूरी कथा सविस्तार श्रवण कराई कि एक बार देव ऋषि नारद जी हिमालय की गुफाओं में तपस्या कर रहे थे समाधि लग गई इंद्र ने कामदेव को भेजा रंभा मेनका सभी ने नृत्य किया। सभी कोशिशें निष्फल रही और समाधि नही टूटी । जब समाधि नहीं टूटी तो कामदेव ने कामबाण का प्रयोग किया वह भी निष्फल रहा। अंत में कामदेव ने क्षमा मांगी। और नारद जी की समाधि खुल गई और नारद जी ने सभी को क्षमा कर दिया लेकिन नारद जी के मन में अभिमान व्याप्त हो गया कि यह जो मैंने कार्य किया यह कोई नहीं कर पाया और भक्त का अभिमान भगवान सहन नहीं कर सकते हैं भगबान ने माया जाल फैलाकर मुनिनारद को फंसा कर रख दिया। जिससे कि नारद जी ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि आप भूमंडल पर जाओ और वहां जाकर मनुष्य रूप धारण करो और जिस स्त्री के लिए मैं रोता भटकता फिर रहा हूं उसी स्त्री के लिए आप रोते भटकते फिरेंगे जैसा आपने वानर स्वरूप मेरा मुंह बनाया है वही वानर तुम्हारी रक्षा करेंगे ऐसा श्राप मिला। इधर दूसरी ओर स्वयंभू महाराज ने सबकुछ अपनी पत्नी के सहित राज्यपाठ को छोड़ दिया और नैमिषारण्य में जाकर तप किया और भगवान श्री सीताराम जी को अपने यहां पर पधारने का आमंत्रण दिया जो श्री राम जी पुत्र रूप में और माता जानकी जी पुत्रवधू के रूप में पधारी । इधर नारद मुनि जी के श्राप से दोनों हरिगण श्रापित होकर रावण कुंभकरण बन गए जिनके अत्याचारों से पृथ्वी अकुला गई और छीर सागर में सोने वाले भगवान नारायण को सभी देवताओं के सहित पुकारती हैं फिर वह आकाशवाणी के माध्यम से भगवान श्री नारायण पृथ्वी को धैर्य बताते है और श्री राम बनकर जन्म लेने की प्रतिज्ञा लेते हैं। कथा के दौरान रतनलाल ठेकेदार, डी के सर्राफ, रामकुमार गर्ग,बिपिन गुप्ता, विनोद गुप्ता, नवीन वर्मा, नवीन गुप्ता, शुभम गोयल एडवोकेट, हरि प्रकाश जिन्दल, कपिल अग्रबाल,रबि गर्ग, मुकुटलाल वर्मा, विवेक सिंघल, अनिल टोपी, अशोक छारिया, पुरुषोत्तम चौबे, रोहित गर्ग, राजीव जिंदल, अमित गोयल उपस्थित थे।
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