रेफरल बढ़ाने के लिए सीएचओ को निक्षय पोर्टल का प्रशिक्षण संपन्न
दूसरे दिन धौलाना ब्लॉक के सीएचओ रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल
प्रशिक्षण के दौरान पंजीकरण से उपचार तक की दी गई जानकारी
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़, 03 मई, 2024। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के एक दिवसीय प्रशिक्षण में शुक्रवार को धौलाना ब्लॉक की बारी थी। मुख्य ट्रेनर डा. दिनेश बी. बालिगा (सलाहकार- विश्व स्वास्थ्य संगठन) और सहायक ट्रेनर जिला कार्यक्रम समन्वयक दीपक शर्मा ने निक्षय पोर्टल का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि स्क्रीनिंग के लिए रेफरल बढ़ाना है। निक्षय आईडी बनाकर ही संभावित रोगी की जांच करानी है। सामान्य दिवसों पर ओपीडी के पांच प्रतिशत और एकीकृत निक्षय दिवस पर 10 प्रतिशत रोगियों को लक्षण के आधार पर टीबी जांच के लिए रेफर करना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे एसीएमओ डा. प्रवीण शर्मा ने कहा -टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में आयुष्मान आरोग्य मंदिर को शामिल किए जाने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की भूमिका मुख्य हो गई है। टीबी मुक्त भारत का संकल्प धरातल पर उतारने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को ब्लॉक वार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डा. राजेश सिंह ने बताया क्रमशः 8 और 13 मई को गढ़मुक्तेश्वर व सिंभावली ब्लॉक के सीएचओ का प्रशिक्षण होगा। हापुड़ ब्लॉक के सीएचओ का प्रशिक्षण बृहस्पतिवार को संपन्न हो चुका है।
डीटीओ ने बताया – टीबी की पुष्टि होने पर उपचार शुरू करने के साथ ही रोगी की बैंक डिटेल पोर्टल पर अपलोड करनी है ताकि उसे निक्षय पोषण योजना का लाभ मिलना शुरू हो सके और साथ ही उसके सभी परिवारिजनों की टीबी जांच करानी है। घर घर के सभी सदस्यों को टीबी प्रीवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) देनी है, साथ ही रोगी की कोमॉर्बिडिटी का पता लगाने के लिए शुगर और एचआईवी जांच करानी है। रोगी की काउंसलिंग करनी है कि टीबी अब असाध्य रोग नहीं रह गया है, नियमित उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है। इसे छिपाने की नहीं बल्कि पूरा उपचार कराने की जरूरत है ताकि उनके परिजनों का बचाव हो सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कंप्यूटर ऑपरेटर सलोनी जिंदल ने सहायक टैक्नीकल ट्रेनर की भूमिका निभाई।
जिला पीपीएम समन्वयक सुशील चौधरी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया-दो सप्ताह से अधिक खांसी, खांसी के साथ बलगम या खून आना, सीने में दर्द, शाम के समय बुखार आना, रात में सोते समय पसीना आना और वजन कम होना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से कोई लक्षण यदि ओपीडी में आने वाले रोगी में नजर आते हैं तो निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत कर टीबी की जांच करानी है। जांच में यदि टीबी की पुष्टि होती है तो पोर्टल पर उसे पॉजिटिव दर्ज करते हुए उपचार शुरू कराना है और यदि टीबी की पुष्टि नहीं होती तो पोर्टल पर निगेटिव दिखाते हुए अपलोड करना है।
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