हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद पर कांग्रेस ने भूतपूर्व चेयरमैन व भूतपूर्व विधायक धर्मपाल सिंह की पुत्री मानवी सिंह को चुनाव में उतारा है। चुनाव में जीत हासिल करने का सपना देख रही कांग्रेस के लिए यह सफर आसान नहीं होगा। इसके पीछे कई कारण हैं:
2017 में रहा था खराब प्रदर्शन:
कांग्रेस ने साल 2017 में चेयरमैन पद पर विजय कुमार गोयल को चुनावी रण में उतारा था लेकिन विजय कुमार गोयल की चुनाव में हार हुई जो दूसरे नहीं बल्कि तीसरे स्थान पर रहे। प्रथम स्थान पर 2017 में विजयी हुए भाजपा के प्रत्याशी प्रफुल्ल सारस्वत रहे जबकि दूसरे स्थान पर निर्दलीय मैदान में उतरे मनीष सिंह उर्फ मोनू पुत्र धर्मपाल सिंह ने 29,050 मत हासिल किए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी विजय कुमार गोयल तीसरे स्थान पर रहे जिन्हें 17,949 वोट हासिल हुए थे।
जमानत नहीं बचा सके थे विजय:
बता दें कि विजय कुमार गोयल पुत्र रघुवीर शरण गोयल चुनाव में मात्र 17.33 प्रतिशत मत ही हासिल कर पाए जो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे। 2017 के निकाय चुनाव में विजय कुमार गोयल की जमानत जब्त हुई थी।
पैराशूट लैंडिंग से अंदरूनी कलह:
कांग्रेस ने भले ही पूर्व चेयरमैन व पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह की बेटी मानवी सिंह को हापुड़ नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद पर मैदान में उतारा है लेकिन मानवी की पैराशूट एंट्री से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल है। चुनाव में लड़ने का सपना देख रहे कुछ प्रत्याशियों के समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है।
गजराज को लेकर दिखी अलग राय:
हापुड़ के पूर्व विधायक गजराज सिंह ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ छोड़ राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया था। अब निकाय चुनाव से पहले उन्होंने एक बार फिर राजनीति का पाला बदलने का प्रयास किया और कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई। हाल ही में हापुड़ की रेलवे रोड पर हुई एक बैठक में गजराज सिंह को लेकर दो अलग राय नजर आई थी। ऐसे में यह भी एक कारण कांग्रेस की जीत पर हावी हो सकता है।
मनीष करेंगे बसपा को समर्थन :
सियासत व राजनीति की इस जंग में भले ही कांग्रेस ने मानवी सिंह को मैदान में उतारा है लेकिन मानवी सिंह के भाई मनीष सिंह ने एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट कर दिया है कि वह पूरी तरह बहुजन समाज पार्टी के साथ हैं और बसपा को चुनाव में जिताने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। ऐसे में दोनों भाई-बहन की राजनीति की राह अलग नजर आ रही है जिससे कांग्रेस की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं। हापुड़ नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद का चुनाव दिलचस्प होने वाला है।
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