हापुड़, सीमन/मोनू शर्मा (ehapurnews.com): गढ़मुक्तेश्वर तहसील रोड पर समाजसेवी पंकज लोधी के निवास कार्यालय पर वीरांगना अवंती अवंतिका बाईलोधी का 165 वां शौर्य बलिदान दिवस विश्व हिंदू राष्ट्र सेना जाट महासभा ब्राह्मण महासंघ राष्ट्रीय लोधी महासभा टीटोरिया संगठन जाटव संघ सैनी महासभा यादव समिति अहिल्या सेवा समिति वैश्य संघ खड़कवंशी संगठन प्रजापति समिति एवं साधु-संतों ने एकत्रित होकर धूमधाम से मनाई गई जिसकी अध्यक्षता गढ़मुक्तेश्वर नक्का कुआं मंदिर के मुख्य महंत बारहां गिरी महाराज जी एवं संचालन मास्टर मदन सैनी ने किया। मंदिर के मुख्य महंत बार हा गिरि महाराज जी ने अवंती कवि लोधी के चित्र पर फूल माला एवं दीप प्रज्वलीत का शुभारंभ किया। विश्व हिंदू राष्ट्र सेनाके प्रदेश अध्यक्ष मोंटी चौधरी ने अवंती बाई लोधी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया की लॉर्ड डलहौजी कि राज्यों को हड़पने की नीति का कुचक्र पूरे देश में तेजी से चलने के विरोध में रानी अवंती लोधी ने राजेराजवाड़े एवं जागीरदारों को संगठित होने का कार्य किया एवं अंग्रेजों के विरोध का फैसला किया।
ब्राह्मण महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारी हर्षवर्धन शर्मा ने बताया कि क्रांति का संदेश गांव-गांव पहुंचने के लिए अवंतिका बाई लोधी ने अपने हाथ का लिखा पुर्जा भिजवाए देश और ऑन के लिए मर मिटो या फिर चूड़ियां पहनो तुम्हें धर्म इंसान की सौगंध है जो इस कागज का पता दुश्मन को दो यादव संगठन की मातृत्व शक्ति कुसुम यादव ने अवंतिका बाई लोधी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत की महान वीरांगना रानी अवंतिका बाई लोधी ने 1857 की लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे एवं अपनी मातृ भूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों को निछावर कर दिया। मातृत्व शक्ति चौधरी राजरानी ने बताया कि अवंतिका बाई लोधी का 1857 की क्रांति में वही योगदान रहा जो रानी लक्ष्मीबाई का रहा। परंतु रानी अवंतिका बाई को इतिहास में वह सम्मान नहीं मिल पाया जो रानी लक्ष्मीबाई को मिला हुआ है। वैश्य समाज के बृजभूषण गर्ग ने बताया की रानी अवंतिका बाईलोधी की सेना जो अंग्रेजों की सेना की तुलना में बहुत छोटी थी फिर भी साहस पूर्वक अंग्रेजों का सामना किया। खड़कवंशी संघ के प्रवक्ता जयसिंह राणा ने बताया कि रानी अवंती का भाई लोधी ने 20 मार्च 1858 को शाहपुर के पास स्थित तालाब के पास बने मंदिर में पूजा अर्चना की और युद्ध के मैदान में उतर गई। यहां अंग्रेज और रानी के बीच घमासान युद्ध हुआ। जाट महासभा के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने बताया कि 20 मार्च 1858 को वीरांगना ने रानी दुर्गावती का अनुसरण करते हुए युद्ध लड़ते हुए अपने आप को चारों तरफ से दुश्मनों से घीरा देखकर स्वयं को तलवार भोपकर देश के लिए बलिदान दे दिया। परंतु अंग्रेजों के हाथ में जिंदा स्वयं को नहीं सोपा। इस अवसर पर चौधरी राजरानी गीता अग्रवाल कुसुम यादव मोनिका राजू आहरिय मोहित प्रजापति शोभित गर्ग संजय शर्मा मोंटी चौधरी गजेंद्र गिरी भगवत प्रजापति विकास लोधी मयंक चौधरी अशोक चौधरी डॉक्टर हर्षवर्धन शर्मा उमेश लोधी पंकज लोधी मंजीत यादव विक्की राज सैनी संजय यादव विपिन शर्मा माया त्यागी योगेंद्र लोधी संजय डिश मास्टर लाकेंद सिंह जय सिंह राणा आदि मौजूद रहे
एक फोन पर कराएं सीवर सैप्टिक टैंक की मशीन द्वारा सफाई: 9219695264



























