महाशिवरात्रि 15 फरवरी व होली 4 मार्च को










महाशिवरात्रि 15 फरवरी व होली 4 मार्च को

हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): महाशिवरात्रि व्रतपर्व 15 फ़रवरी रविवार कावड़ जलाभिषेक सायं 5.05 बजे से तथा रंगों का पर्व होली 4 मार्च बुधवार को मनाया जाएगा तथा होलिका दहन 3 मार्च मंगलवार को सुबह 5.29 बजे के बाद से 6.19 बजे के बीच किया जाएगा।

भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा विद्वानों ने दिल्ली रोड स्थित शांकुंभरी मंदिर (गाय वाला मंदिर) हापुड़ में बैठक कर गहन मंत्रणा के बाद सर्वसम्मति से शास्त्रसम्मत निर्णय किया। महाशिवरात्रि पर्व मुहूर्त की जानकारी देते हुए महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि चतुर्दशी तिथि 15 फ़रवरी को दोपहर बाद 5.05 बजे से प्रारम्भ होकर 16 फ़रवरी को दोपहर बाद 5.34 तक रहेगा। निर्णयसिंधु वचन अनुसार प्रदोषव्यापिनी ग्राह्या शिवरात्रिश्चतुर्दशी। अर्थात शिवरात्रि में चतुर्दशी प्रदोषव्यापिनी ग्रहण करे और आदित्यास्तमये काले अस्ति चेद्या चतुर्दशी। तद्रात्रिः शिवरात्रिः स्यात्सा भवेदुत्तमोत्तमा ।। अर्थात सूर्यास्त समय में यदि चतुर्दशी हो तो उस रात्रि को ‘शिवरात्रि’ कहते हैं तथा एक अन्य शास्त्र प्रमाण के अनुसार अर्धरात्रादधश्चोर्ध्वं युक्ता यत्र चतुर्दशी। तत्तिथावेव कुर्वीत शिवरात्रिव्रतं व्रती ।। अर्थात आधीरात के पहले और आधी रात के बाद जहाँ चतुर्दशी युक्त हो उसी तिथि में ही व्रती शिवरात्रि व्रत को करे 15 फ़रवरी को पूरी रात चतुर्दशी प्राप्त होने होने से उत्तराषाढ़ा व श्रवण नक्षत्र तथा सर्वार्थसिद्धि योग में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा।

आचार्य पंडित देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि महाशिवरात्रि पर सायंकाळ प्रारम्भ होकर सूर्योदय पूर्व तक 4 प्रहर पूजा का विधान है जो 15 फ़रवरी को सायं 6.09 बजे से शुभ रहेगा। महासभा विद्वानों ने होली पर्व के सम्बन्ध में गहन मंत्रणा की पंडित देवी प्रसाद तिवारी ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 02 मार्च को सायं 5.55 बजे से प्रारम्भ होकर 03 मार्च को दोपहर बाद 5.07 बजे तक रहेगा। परन्तु 2 मार्च को सायंकाल 5.55 पर अशुभ भद्रा के साथ पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होने तथा 3 मार्च को दोपहर 3.20 पर भारत में दृश्य चन्द्रग्रहण लगने से सूतक 3 मार्च को सुबह 6.20 बजे से प्रारम्भ हो जाएगा। महासभा संरक्षक डॉ0 वासुदेव शर्मा ने कहा कि धर्मग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि भद्राकाल और ग्रहण में होलिका दहन करना अशुभ होता है। उन्होंने निर्णय सिंधु ग्रंथ उदाहरण दिया ‘भद्रायां द्वे न कर्तव्य श्रावणी फाल्गुनी तथा श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी अर्थात होलीका दहन के समय भद्रा हो तो ग्राम -घर के लिए अशुभ कहा गया है। एक अन्य वचन अनुसार “भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभङ्गं करोति वै। नगरस्य च नैवेष्टा तस्मात्तां परिवर्जयेत्।। अर्थात भद्रा में होली को प्रदीप्त (जलाने पर) करने पर निश्चय राष्ट्रभंग करती है तथा नगर का भी इष्ट नहीं करती है अनिष्ट होता है। अतः उसको त्याग दे।

समस्त विद्वानों ने अनेक धर्मग्रंथों के अवलोकन के बाद होलिका दहन के लिए 3 मार्च की सुबह 5.29 बजे से 6.19 बजे तक 50 मिनट का पूर्णतः शास्त्रसम्मत समय सर्व सहमति से निर्णित किया। पंडित नन्द किशोर वाजपेयी एवं पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले ने बताया कि विशेष परिस्थिति होने के कारण होलिका पूजन भद्रामुख छोड़कर रात्रि 8.15 के बाद मघा नक्षत्र एवं सुकर्मा योग में किया जाएगा तथा 03 की सुबह (भोर) 4 बजे से 5.30 बजे तक पूजन करना अधिक शुभ रहेगा। स्नान, दान की पूर्णिमा भी 03 मार्च को रहेगा। विदुषी अनिशा सोनी पाण्डेय ने बताया कि होलिका पूजन में उपले, नारियल, पान, सुपारी, अक्षत, जल, बतासा धूप, गंध, चना के साथ मिष्ठान चढ़ाना चाहिए। साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र जप करना चाहिए। होलिकापूजन व दहन के समय मंत्र- अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ॥ जप करते हुए होलिका की 7 बार परिक्रमा करें तथा जलती हुई होलिका में गेहूँ की बालियां भूनने की भी परम्परा है होली से 8 दिन पूर्व फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होलाष्टक़ की मान्यता उत्तर भारत पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि में है  ग्रहों की उग्र स्थिति के कारण इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है होलाष्टक 24 फरवरी को सुबह 7 बजकर 02 मिनट से शुरु होकर 03  मार्च तक रहेगा अतः समस्त मांगलिक शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन, मुंडन आदि कार्य वर्जित रहेंगे बैठक में समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय, संगठन मंत्री पंडित जगदम्बा शर्मा, लेखानिरीक्षक पंडित अमर प्रकाश पाण्डेय, प्रवक्ता पंडित आशीष पोखरीयाल, पंडित उमेश शर्मा, मंत्री डॉ0 करुण शर्मा, पंडित शैलेन्द्र मिश्रा शास्त्री, पंडित अजय त्रिपाठी, पंडित शैलेन्द्र अवस्थी, पंडित जयप्रकाश त्रिवेदी, पंडित दिलीप कुमार शर्मा, पंडित शिवम शुक्ला,पंडित दीपक तिवारी, पंडित जगदीश नारायण पाण्डेय, पंडित  राहुल शर्मा ऑडिटर, महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय, श्रीमती पूजा, पंडित प्रशांत वशिष्ठ, पंडित ओमप्रकाश पोखरियाल, पंडित संतोष तिवारी, पंडित गौरव कौशिक आदि ने विचार रखा, संरक्षक डॉ0 वासुदेव शर्मा एवं पंडित नन्दकिशोर वाजपेयी निर्णय प्रमुख रहे तथा बैठक की अध्यक्षता ज्योतिर्विद पं0 के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने किया.

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