
एनसीआर की जीवनशैली की चुनौतियाँ: श्वसन एवं त्वचा रोगों के लिए चेतावनी:डॉ. वेदांत वर्मा
हापुड, वि.(ehapurnews.com): आज के समय में जीवनयापन की सबसे बड़ी कीमत हम अपने स्वास्थ्य से चुका रहे हैं। तीव्र औद्योगिकीकरण, अंधाधुंध निर्माण कार्य और वायु व जल की गिरती गुणवत्ता के कारण प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया है। हम उन सीमाओं को पार कर रहे हैं, जिन्हें कभी अकल्पनीय माना जाता था। खराब पर्यावरणीय परिस्थितियाँ अब एक नई महामारी का रूप ले चुकी हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) — विशेषकर दिल्ली और उससे सटे हापुड़ जैसे शहर — तेजी से विकसित हो रहे हैं, परंतु इस विकास की अंधी दौड़ ने आम जन के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
श्वसन और त्वचा रोगों में अचानक वृद्धि कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वायु और जल की खराब गुणवत्ता के कारण फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी आ रही है तथा ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और सीओपीडी जैसे दीर्घकालिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। सांस फूलना, खांसी, गले में खराश, जकड़न और आंखों में जलन जैसे लक्षण आम हो गए हैं।
आज स्थिति इतनी गंभीर है कि 20 लाख से अधिक बच्चे श्वसन संबंधी बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं, जो हमारे वर्तमान के लिए अत्यंत चिंताजनक संकेत है।
क्या करें:
*प्रदूषण के चरम समय में बाहर जाने से बचें, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग।
*सुबह 6 से 9 बजे तथा शाम 4 से 7 बजे के बीच खिड़कियाँ बंद रखें।
*एयर प्यूरीफायर और घर के भीतर पौधों का उपयोग करें।
*बाहर निकलते समय मास्क अवश्य पहनें।
*किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
होम्योपैथी: शरीर की इम्युनिटी को सशक्त बनाती है
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. वेदांत वर्मा के अनुसार, होम्योपैथिक औषधियाँ श्वसन एवं त्वचा एलर्जी में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती हैं। इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और ये दीर्घकालिक लाभ प्रदान करती हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में इसके परिणाम अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं।
प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और होम्योपैथी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह न केवल रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को भी सुदृढ़ करती है।
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