
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से जाने हनुमान जन्मोत्सव कैसे मनाएं, पूजन का मुहुर्त व विधि
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): श्री हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल 2026, दिन गुरुवार को चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाएगी और पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय तक और इस दिन कुछ खास योग-नक्षत्र संयोग बन रहा है।
ध्रुव योग
यह दिन के शुरूआती समय से लगाकर लगभग दोपहर 02:20 बजे तक रहेगा। ध्रुव योग को स्थिरता, दृढ़ता और लंबे समय तक चलने वाले कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसी योग में हनुमान जी की पूजा, व्रत और उपाय अधिक फलदायी माने जाते हैं।
व्याघात योग
ध्रुव योग के बाद व्याघात योग शुरू होगा, जिसमें कट‑छाँट या बाधा देने वाली शक्तियाँ बढ़ती मानी जाती हैं; इसलिए नए बड़े‑बड़े कार्यों की शुरुआत इस योग में न करना उचित रहता है।
नक्षत्र और संयोग
हस्त नक्षत्र श्री हनुमान जन्मोत्सव पर हस्त नक्षत्र का भी शुभ संयोग है, जो सुबह से लेकर लगभग शाम 05:38 बजे तक रहेगा। हस्त नक्षत्र कार्यों में कुशलता, रचनात्मकता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए माना जाता है, इसलिए पूजा‑पाठ और हलके कार्य बहुत अच्छे माने जाते हैं।
शाम के समय हस्त से चित्रा नक्षत्र में बदलाव होगा, जो भी अपने गुण लेकर आता है, किन्तु दिन का प्रमुख शुभ संयोग हस्त + ध्रुव योग ही माना जा रहा है। लगभग 04:30–06:00 बजे के बीच (सूर्योदय समय क्षेत्रानुसार थोड़ा भिन्न)।
इस समय पूजा‑पाठ और जाप को अत्यंत शुभ माना जाता है।विशेषकर हनुमान चालीसा व बीज मंत्र जाप के लिए। सुबह 09:00 बजे से पहले, अभिजीत मुहूर्त
लगभग 11:50 बजे से 12:40 बजे तक (दिल्ली क्षेत्र के अनुसार)।
विशेष मनोकामना, संकल्प लेकर पूजा, दीपदान या दान आदि के लिए अत्यंत शुभ।
प्रदोष काल (शाम का शुभ काल)
लगभग शाम 5:00–7:00 बजे के बीच (क्षेत्रानुसार अलग‑अलग)।
शाम की पूजा, आरती और हवन/होम के लिए बहुत उपयुक्त; इसमें घी‑दीपक के साथ चालीसा पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
सुबह स्नान करके साफ‑सुथरे लाल/सिंदूर या साफेद वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को साफ करें, चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर बाल‑हनुमान या वयस्क हनुमान की मूर्ति या फोटो रखें। आसन मंत्र के साथ फूल चढ़ाकर उन्हें आसन दें, फिर मन में आवाहन करें कि भगवान हनुमान पूजा में पधारें।
अपने नाम और गोत्र का उल्लेख करते हुए संकल्प में कहें कि इस पूजा से शरीर, मन और परिवार की सुरक्षा तथा भजन‑साधना में बल मिले।
पाद्य (पैर धोने का पानी), अर्घ्य (जल), आचमन, फूल, अक्षत (चावल), धूप, दीप, नैवेद्य (सिंगाड़ा, चना, लड्डू, केला, मिश्री) चढ़ाएँ।
चोला वाला सिंदूर (पीला सिंदूर ) ,घी या चमेली का तेल, लाल फूल, लड्डू श्री हनुमान जी को अत्यंत प्रिय हैं।
ॐ हं हनुमते नमः या ॐ हनुमते नमः का जाप करें।
हनुमान चालीसा का पाठ (सुबह और शाम दोनों अच्छे) करें; कम‑से‑कम एक बार अवश्य पूर्णत: पढ़ें। अंत में घंटी बजाकर आरती करें, फिर प्रसाद वितरित करें।
कई भक्त पूर्ण उपवास या फलाहार रखते हैं; लाल या पीले वस्तु‑दान (सिंदूर, गुड़ ,लाल कपड़ा, चना आदि) शुभ माना गया है।
कब मनाई जाती है
हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। पहली कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में, और दूसरी चैत्र पूर्णिमा को विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में।
क्यों मनाई जाती है
यह पर्व हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और भय नाशक गुणों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। कथा के अनुसार, बचपन में सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश पर हनुमान जी मूर्छित हो गए, तब देवताओं ने चैत्र पूर्णिमा को उन्हें नया जीवन दिया।
संपर्क:
श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा (रजि.)
(प्रदेश अध्यक्ष )
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ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
संपर्क सूत्र :- 9634408321
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