हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : देशी व वनस्पति घी जैसे खुले बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में मवेशियों की चर्बी की मिलावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मवेशियों की चर्बी को इतना रिफाइन कर दिया जाता है कि चर्बी व घी में भेद करना मुश्किल है। इसका खुलासा कई बार हापुड़ से हो चुका है फिर भी यह धंधा जारी है।
जनपद हापुड़ व आस-पास के इलाके में जितने भी वैध-अवैध बूचड़खाने हैं, उनसे चर्बी एकत्र करके हापुड़ लाई जाती है और फिर उस चर्बी को रसायनों की मदद से परिष्कृत किया जाता है। परिष्कृत चर्बी को देशी व वनस्पति घी जैसे खाद्य पदार्थों बनाने वाली औद्योगिक यूनिटों को सप्लाई किया जाता है। यह धंधा बोगस फर्मों द्वारा जारी बिलिंग के धंधे पर टिका है।
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