विश्व में श्रेष्ठ है भारतीय व सनातन संस्कृतिः कार्तिक गोस्वामी
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): वृंदावन के संत प्रवर श्री कार्तिक गोस्वामी जी महाराज ने शनिवार को हापुड़ में कहा कि भारतीय व सनातन संस्कृति की राह पर चल कर तथा स्वदेशी का अपना कर ही जीवन को आगे बढ़ा जा सकता है। पाश्चात्य संस्कृति विनाश की संस्कृति है।
संत प्रवर श्री कार्तिक गोस्वामी जी महाराज शनिवार को श्री सनातन धर्म सभा हापुड़ के अध्यक्ष रोहित गर्ग के आवास पर पहुंचे, जहां रोहित गर्ग व उनकी पत्नी पारुल गर्ग आदि ने संत प्रवर पर पुष्प वर्षा कर व सनातन धर्म की जय हो के उद्घोष के साथ स्वागत किया।

संत प्रवर ने पश्चिमी सभ्यता तथा विदेशी खान-पान के बढ़ते हुए प्रवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व में भारतीय संस्कृति से श्रेष्ठ अन्य कोई संस्कृति नहीं है। उन्होंने नौजवानों से विदेशी जींस, चाऊमीन बर्गर तथा पिज्जा जैसे व्यंजनों का त्याग कर भारतीय परिधान व भारतीय व्यंजनों को अपनाने का आह्वान किया। संत प्रवर ने मांस, मदिरा के बढ़ते हुए सेवन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। मांस, मदिरा के सेवन से मानव का मन व स्वभाव चिढ़-चिढ़ा व खौंफनाक होगा जिससे परिवार में अशांति होगी। शाकाहारी भोजन के सेवन से मनुष्य स्वस्थ रहेगा और परिवार में शांति का वास होगा। यदि मनुष्य तन और मन को शुद्ध रखना चाहते है, दो सात्विक आहार का सेवन करें। हिंसा से दूर रहने वाला मनुष्य ही हिंदू है।
संत श्री कार्तिक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि अंग्रेजियत अभी लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही है। भाषा के आधार पर योग्यता का निर्धारण हो रहा है। जिस कारण मेधावी पिछड़ रहा है। नौजवानों को मां-बाप से प्रेम नहीं, अपने मोबाइल से अधिक है जिस कारण परिवार में दूरियां बढ़ रही है। उन्होंने आह्वान किया कि लोगों को भारतीय उत्पाद, भारतीय परिधान, भारतीय व्यंजन को अपनाने के साथ-साथ भारतीय व सनातन संस्कृति को अपनाना चाहिए।
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